कंगना पर हमलावर हुई शिवसेना:सामना में लिखा-एक आने की भांग पी उन्हें सूझती हैं ढेरों कल्पनाएं, कंगना के बम से बिखरा भाजपा का नकली राष्ट्रवाद

मुंबई3 महीने पहले
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सामना अखबार के कार्यकारी संपादक शिवसेना के सांसद संजय राउत(बाएं) हैं, वे पहले भी कंगना पर टिप्पणी करते रहे हैं। - Dainik Bhaskar
सामना अखबार के कार्यकारी संपादक शिवसेना के सांसद संजय राउत(बाएं) हैं, वे पहले भी कंगना पर टिप्पणी करते रहे हैं।

आजादी को लेकर एक्ट्रेस कंगना रनोट ने विवादास्पद बयान क्या दिया, पूरे देश में उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया में लोग जमकर भड़ास निकालने लगे। कई राज्यों में एक्ट्रेस के खिलाफ केस हुए और दर्जनों कंप्लेंट दर्ज हुई। इसी कड़ी में शिवसेना ने शनिवार को पार्टी के मुखपत्र 'सामना' की संपादकीय एक्ट्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा है। शिवसेना ने लिखा है, कंगना बेन रनोट ने एक बम फोड़ा है। इससे भाजपा का नकली राष्ट्रवाद बिखर गया है। शिवसेना ने लिखा है कि कंगन को एक आने की भांग पी ढेरों कल्पनाएं सूझने लगती है।

क्रांतिकारियों का इतना भयंकर अपमान कभी नहीं हुआ
शिवसेना ने आगे लिखा है,'स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों का इतना भयंकर अपमान कभी किसी ने नहीं किया था। कंगना बेन को हाल ही में सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। इससे पहले ये सम्मान हिंदुस्थानी स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेनेवाले वीरों को ही मिला है। उन्हीं वीरों का अपमान करने वाली कंगना बेन को भी ऐसे ही सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना, यह देश का दुर्भाग्य है।'

एक आने की भांग पी ढेरों कल्पनाएं सूझने लगती हैं
सामना में आगे लिखा गया,'कंगना बेन ने इससे पहले महात्मा गांधी का भी अपमान किया था। उनका नाथूराम प्रेम उबाल मारता रहता है। उनके चिल्लाने की ओर आमतौर पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता है। एक आने की भांग पी ली तो ढेरों कल्पनाएं सूझने लगती हैं, ऐसा एक बार तिलक ने कहा था। कंगना बेन के मामले में तिलक की बातें शत-प्रतिशत सही सिद्ध होती हैं।'

'भीख' कहकर संबोधित करना राष्ट्रद्रोह का ही मामला है
संपादकीय में आगे लिखा है,"वर्ष 1947 में आजादी मिली ही नहीं, बल्कि भीख मिली, परंतु उस भीख मांगने की प्रक्रिया में कंगना के वर्तमान राजनीतिक पूर्वज कहीं भी नहीं थे। गांधीजी द्वारा ‘चले जाओ’ का नारा देते ही मुंबई के मिल मजदूर सड़क पर उतर गए और अंग्रेजों को भागने के लिए जमीन कम पड़ गई। जलियांवाला बाग जैसे हत्याकांड कराकर अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों के रक्त से स्नान किया। खून, पसीना, आंसू आदि त्यागों से मिली हमारी आजादी को ‘भीख’ कहकर संबोधित करना राष्ट्रद्रोह का ही मामला है।"

कंगना बेन का राष्ट्रीय पुरस्कार वापस लेना चाहिए
शिवसेना ने आगे लिखा है,"ऐसे व्यक्ति को देश के राष्ट्रपति ‘पद्मश्री’ पुरस्कार देते हैं। उस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी उपस्थित रहते हैं और स्वतंत्रता को भीख की उपमा देनेवाली कंगना बेन की आंखें भरकर सराहना करते हैं। स्वतंत्रता और क्रांतिकारियों के बलिदान के प्रति थोड़ी-सी भी श्रद्धा होगी तो इस राष्ट्रद्रोही वक्तव्य के लिए कंगना बेन का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार वापस लेना चाहिए।"

अफीम-गांजे के नशे में गरारा करते हुए क्रांतिकारियों को भिखारी कहा
सामना में लिखा गया है कि बीजेपी की कंगना बेन तो भगत सिंह से वीर सावरकर तक सभी पर अफीम-गांजे के नशे में गरारा करते हुए उन्हें भिखारी ठहरा दिया है। कंगना बेन के अनुसार देश को वास्तविक आजादी वर्ष 2014 में मिली। मोदी का राज्य यही आजादी है। बाकी सब झूठ! इस ऐतिहासिक विचार से भाजपाई वीर पुरुष सहमत हैं क्या?

भाजपा के प्रखर राष्ट्रवादी अभी तक खामोश हैं
शिवसेना ने लिखा," भाजपाई सांसद वरुण गांधी ने कंगना बेन के दिवालिए बयान का धिक्कार किया है, यह देशद्रोह ही है, ऐसा वरुण गांधी कहते हैं। अनुपम खेर ने भी शरमाते हुए कंगना का निषेध किया है, परंतु भाजपा के प्रखर राष्ट्रवादी अभी तक खामोश क्यों हैं?"

कंगन किस कारण बहरी हुईं यह NCB ही खोज सकती है
सामना में लिखा गया है,"कंगना बेन का सिर सुन्न हो गया है, ऐसा वरुण गांधी कहते हैं। किस कारण से वे बहरी हुई हैं, यह एनसीबी के वानखेड़े ही खोज सकते हैं! परंतु मोदी सरकार का सिर भी उसी कारण से बहरा नहीं हुआ होगा तो इस देशद्रोह के लिए कंगना बेन के सभी राष्ट्रीय पुरस्कार वे वापस लेंगे। वीरों की, स्वतंत्रता का अपमान देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा"