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  • Some Muslim Youths Performed The Last Rites Of A 75 year old Hindu Elder After Eid Prayers, Relatives Were Stranded In Another City Due To Lockdown

पुणे:ईद की नमाज के बाद मुस्लिम युवकों ने 75 साल के हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया, लॉकडाउन की वजह से दूसरे शहर में फंसे थे रिश्तेदार

पुणे2 वर्ष पहले
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बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करने वाले सभी युवक केसनंद मुस्लिम कम्युनिटी से जुड़े हुए हैं।
  • पुणे के केसनंद इलाके में रहने वाले बुजुर्ग शेकू क्षीरसागर की बीमारी के चलते मौत हुई थी
  • मुस्लिम युवक कंधे पर शव को उठाकर 'राम नाम सत्य है' कहकर श्मशान ले गए

ईद के अवसर पर पुणे में हिंदू-मुस्लिम एकता की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली। यहां ईद की नमाज के बाद कुछ मुस्लिम युवकों ने एक हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में किया। 

पुणे के केसनंद इलाके में रहने वाले 75 साल के बुजुर्ग शेकू क्षीरसागर की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। क्षीरसागर अपनी पत्नी के साथ यहां अकेले रहते थे। उनके परिवार के अन्य सदस्य नागपुर के पास रहते थे। लॉकडाउन के कारण वे पुणे आने में असमर्थ थे। 

पूरे हिंदू रिवाज से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार इन पांच युवकों ने किया।
पूरे हिंदू रिवाज से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार इन पांच युवकों ने किया।

ऐसी स्थिति में रहीम शेख नाम के शख्स ने जान मुहम्मद पठान, अप्पा शेख, आसिफ शेख, सद्दाम शेख, अल्ताप शेख और साहबराव जगताप के साथ ईद की नमाज के बाद हॉस्पिटल जाकर बुजुर्ग का शव लिया और हिंदू रिवाज से अंतिम संस्कार भी किया। चारों मुस्लिम युवक कंधे पर शव को उठाकर 'राम नाम सत्य है' कहकर पहुंचे। यहां श्मशान भूमि में चिता की लकड़ी भी इन्होंने ही सजाई थी।

श्मशान घाट में मुस्लिम युवकों ने अपने हाथ से ही बुजुर्ग की चिता सजाई।
श्मशान घाट में मुस्लिम युवकों ने अपने हाथ से ही बुजुर्ग की चिता सजाई।

संक्रमण के डर से अंतिम संस्कार के लिए नहीं आ रहा था कोई आगे

बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करने वाले रहीम शेख ने बताया, "इनके परिवार के सदस्य रोजी-रोटी के लिए शहर से बाहर रहते हैं। यहां सिर्फ वे और उनकी पत्नी रहते थे। लॉकडाउन की वजह से वे यहां आ नहीं सकते थे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अन्य लोग उनके पास नहीं आ रहे थे। हम सभी इनके बेटे की उम्र के हैं। इसलिए हमने यह फर्ज निभाते हुए इनका अंतिम संस्कार किया। आज ईद है और अल्लाह की ओर से यह संदेश दिया गया है कि बुरे वक्त में किसी की मदद करना सबसे बड़ी इबादत है।"