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नागपुर ATS को बड़ी कामयाबी:RSS मुख्यालय की रेकी करने वाला संदिग्ध आतंकी जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार, जुलाई में आया था नागपुर

नागपुर4 महीने पहले
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय हमेशा से ही चरमपंथियों के निशाने पर रहा है। इसलिए इस इलाके में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। - Dainik Bhaskar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय हमेशा से ही चरमपंथियों के निशाने पर रहा है। इसलिए इस इलाके में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है।

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय की रेकी करने वाले संदिग्ध आतंकी को नागपुर की एटीएस टीम ने जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रईस अहमद असदुल्ला शेख के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि रईस, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रहा था।

हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपी को एक अन्य मामले में जनवरी में गिरफ्तार किया था। प्रोडक्शन वारंट पर नागपुर एटीएस ने रईस अहमद को हिरासत में लिया है और जल्द ही उसे नागपुर लाया जाएगा। शेख पिछले साल जुलाई महीने में नागपुर आया था और उसने हेगडेवर स्मृति भवन कैंपस व अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद नागपुर पुलिस ने संघ मुख्यालय की सुरक्षा कड़ी कर दी थी। हेगडेवर मेमोरियल बिल्डिंग क्षेत्र में ड्रोन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

आरोपी ने स्वीकार किया रेकी की बात
घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज की सहायत से जांच शुरू हुई और रईस अहमद शेख की तलाश की जा रही थी। अंततः उसे जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, रईस ने स्वीकार किया कि उसने पाकिस्तान में जैश के आका के इशारे पर RSS मुख्यालय में रेकी की थी। कस्टडी में लेने के बाद नागपुर एटीएस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जम्मू-कश्मीर में रईस से पूछताछ की है। एटीएस ने आगे की जांच के लिए रईस को हिरासत में ले लिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय हमेशा से ही चरमपंथियों के निशाने पर रहा है। इसलिए इस इलाके में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रईस की पूछताछ से और क्या जानकारी सामने आती है।

इस रेकी के बाद से संघ मुख्यालय में सुरक्षा कड़ी की गई है।
इस रेकी के बाद से संघ मुख्यालय में सुरक्षा कड़ी की गई है।

2020 में भी हमले की बात सामने आई थी

इससे पहले अक्टूबर 2020 में आरएसएस नेताओं पर आतंकी हमले की साजिश की बात सामने आई थी। उस समय यह कहा गया था कि हमले के लिए आतंकवादी आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) या विस्फोटकों से लदी गाड़ी (वीआईईडी) का इस्तेमाल कर सकते हैं। उस दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) दिल्ली के मुताबिक, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान और पूर्वोत्तर के राज्यों के नेताओं को टारगेट किया गया था।

2006 में आरएसएस मुख्यालय पर हुआ था आतंकी हमला

बता दें कि जून 2006 की सुबह लगभग 4 बजे आरएसएस मुख्यालय पर एक आतंकी हमला हुआ था। एक लाल बत्ती वाली एम्बेसडर कार आरएसएस मुख्यालय की ओर आ रही थी। कार पर लाल बत्ती देख जवान सचेत हो गए। जवानों ने कार को रुकने का इशारा किया, लेकिन कार नहीं रुकी। इसके बाद आरएसएस मुख्यालय से लगभग 100 मीटर की दूरी पर कार थमी। जवान जब कार के नजदीक पहुंचा तो उसने देखा कि कार में 20 से 22 साल के 3 लड़के सवार थे। पुलिस ने लड़कों को जांच के लिए नीचे उतरने को कहा तो कार बैरियर तोड़ते हुए आगे बढ़ गई। कार बैरियर तोड़ते हुए जैसे ही आगे बढ़ी तो पुलिस को लड़कों के पास हथियार दिखाई दिए। पुलिस ने खतरे को भांपते हुए कार का पीछा किया। तभी कार में सवार आतंकियों ने फायरिंग की। इस मुठभेड़ में पुलिस ने कार में सवार तीनों आतंकियों को मार गिराया था।