उद्धव की चिट्ठी से नाराज हुए राज्यपाल:विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की अनुमति वाले पत्र को कोश्यारी ने बताया धमकी वाला, कहा-मुझे भाषा देख बहुत दुख हुआ

मुंबई5 महीने पहले
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उद्धव ने   27 और 28 तारीख यानी सत्र के आखिरी दो दिनों में अध्यक्ष पद का चुनाव कराने की स्वीकृति मांगी थी, जिसे राज्यपाल ने मना कर दिया। - Dainik Bhaskar
उद्धव ने  27 और 28 तारीख यानी सत्र के आखिरी दो दिनों में अध्यक्ष पद का चुनाव कराने की स्वीकृति मांगी थी, जिसे राज्यपाल ने मना कर दिया।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव को लेकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और सीएम उद्धव ठाकरे के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। चुनाव करवाने की मांग को लेकर रविवार के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने CM उद्धव ठाकरे का एक पत्र राज्यपाल को सौंपा था। इसमें 27 और 28 तारीख यानी सत्र के आखिरी दो दिनों में अध्यक्ष पद का चुनाव कराने की स्वीकृति मांगी थी। जिस पर राज्यपाल ने कानूनी सलाह लेकर उत्तर देने की बात कही थी।

इसी के बाद CM ने एक और पत्र राज्यपाल को भेजा, जिसकी भाषा पर अब राज्यपाल की ओर से आपत्ति जताई गई है। उन्होंने पत्र की भाषा को धमकी भरा होने की बात कही है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि पत्र की भाषा देख उन्हें दुख हुआ है। राज्यपाल के ताजा रुख के बाद माना जा रहा है कि सरकार बनाम राज्यपाल की यह लड़ाई और बढ़ सकती है। नाना पटोले द्वारा इस्तीफा देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष का पद इस साल फरवरी से ही खाली है।

राज्यपाल के जवाब का पत्र। इसकी आखिरी लाइन में राज्यपाल ने नाराजगी जताई है।
राज्यपाल के जवाब का पत्र। इसकी आखिरी लाइन में राज्यपाल ने नाराजगी जताई है।

बंद लिफाफे में राज्यपाल ने भेजा था जवाब
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को एक बंद लिफाफे में अपना जवाब भेजा था। इसी में राज्यपाल ने नाराजगी जताई है। इसके बाद गतिविधियां तेजी से बदलीं। सत्ताधारी नेताओं ने इस पर मुख्यमंत्री से संपर्क कर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद अजित पवार राज्यपाल के मत के विरोध में जाकर चुनाव करवाने को तैयार नहीं हो रहे थे। उनकी राय थी कि इससे संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा। राज्यपाल की ओर से तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आएंगी। यह राज्य सरकार द्वारा अनावश्यक रूप से एक नए संकट को निमंत्रण देने जैसा होगा।

राष्ट्रपति शासन का पैदा हो गया था डर

महाविकास अघाड़ी के कुछ नेताओं के दिल में इस बात का डर पैदा हो गया था कि राज्यपाल की सहमति के बिना अगर विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव करवाया जाता है, तो राज्यपाल निश्चय ही कोई बड़ा कदम उठाएंगे। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है। इसलिए संवैधानिक संकट का सवाल और राष्ट्रपति शासन का डर देखते हुए महाविकास आघाडी सरकार ने दो कदम पीछे खींच लेने में ही भलाई समझी।

महाविकास अघाड़ी सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें एक लैटर सौंपा था।
महाविकास अघाड़ी सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें एक लैटर सौंपा था।

शरद पवार ने सीएम उद्धव ठाकरे को क्या सलाह दी?

इसके बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन किया। उन्होंने बताया कि वे इस बारे में कानूनी विमर्श कर चुके हैं और इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चुनाव नहीं करवाया जाए। सूत्रों से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक पवार की इस सलाह के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव ना करवाने का फैसला ले लिया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल बेहद अध्ययनशील: राउत
इसी विवाद पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि राज्यपाल को विधानसभा के अधिकारों और सरकार के सुझावों को खारिज करने के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल बेहद अध्ययनशील प्रतीत होते हैं और इससे उनका पाचन तंत्र बिगड़ सकता है।

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा, 'अगर राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों के विपरीत काम कर रहे हैं तो राज्य को कुछ राजनीतिक कदम उठाने पड़ेंगे।' हालांकि राउत ने कहा कि वह (नए अध्यक्ष के चुनाव के मामले पर) मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल को लिखे पत्र पर कुछ नहीं कहेंगे।

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