कृषि कानून रद्द होने पर महाराष्ट्र में बयानबाजी:CM उद्धव ठाकरे बोले- पहले जाग जाते तो अपमान नहीं होता, पवार ने कहा- चुनाव के डर से लिया फैसला

मुंबई6 महीने पहले
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महाविकास अघाड़ी के सभी नेताओं ने इस फैसले को किसानों की जीत करार दिया है। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
महाविकास अघाड़ी के सभी नेताओं ने इस फैसले को किसानों की जीत करार दिया है। -फाइल फोटो

तीनों कृषि कानून रद्द करने के ऐलान को महाराष्ट्र के लगभग सभी बड़े नेताओं ने किसानों की जीत बताया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा,"कृषि अधिनियम को निरस्त करने की घोषणा इस बात का उदाहरण है कि इस देश में आम आदमी क्या कर सकता है और इसकी ताकत क्या है।" CM ने कहा कि अगर सरकार पहले ध्यान देती तो जो अपमान अब हुआ है, वह पहले नहीं होता।

CM ने आगे कहा कि इससे पहले कि केंद्र इस तरह का कानून बनाए, उसे सभी विपक्षी दलों के साथ-साथ संबंधित संगठनों को भी साथ लेकर देश के हित में निर्णय लेना चाहिए ताकि, आज जो अपमान हुआ है, वह आगे नहीं हो। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इन कानूनों को निरस्त करने की तकनीकी प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।"

किसानों को मेरा सलाम: उद्धव
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पूरे देश में किसान कानूनों के खिलाफ विरोध का माहौल है। आंदोलन शुरू हुआ और आज भी जारी है। हम सबका पेट भरने वाले कमाने वाले इसके शिकार हो रहे हैं। लेकिन अन्नदाता ने अपना पराक्रम दिखाया, उसे मेरा तीन गुना सलाम। उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस अवसर पर मैं इस आंदोलन में जान गंवाने वाले सभी वीरों को नमन करता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा- गुरु नानक जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा आज की गई घोषणा का स्वागत करता हूं। महाविकास अघाड़ी ने इन कृषि कानूनों के खिलाफ बार-बार अपनी स्थिति बताई है और कैबिनेट और विधायिका में इन कानूनों के प्रतिकूल प्रभावों पर भी चर्चा की है।

चुनाव में कीमत चुकानी पड़ती: पवार
कृषि कानून को वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा,'केंद्र सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि भाजपा के प्रतिनिधि गांव का दौरा करने के दौरान लोगों के सवालों का जवाब नहीं दे सके। इस समय मोदी सरकार ने कानून पारित करने से पहले किसी भी विपक्ष, किसान नेता या राज्य सरकार से चर्चा नहीं की।' पवार ने कहा कि मोदी सरकार पर तंज कसते हुए पवार ने कहा उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव आने वाले हैं, यह महसूस करने के बाद कि इस चुनाव में कीमत चुकानी पड़ेगी, इन कानूनों को वापस ले लिया गया।

कृषि कानून पर बिना चर्चा के निर्णय लेना गलत था। हमें किसानों से चर्चा करनी चाहिए थी। मैं भी कृषि मंत्री था तो हम बदलाव के बारे में चर्चा करते थे। उसके बाद सरकार बदल गई और मोदी सरकार एक ही बार में तीन कानून सदन में लाई। यह कानून सिर्फ 3 घंटे में पारित कर दिया गया।

देर आए दुरुस्त आए: संजय राउत
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि यह किसान आंदोलन की विजय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का शिवसेना स्वागत करती है। 550 किसानों ने इस कृषि विधेयक कानून के विरोध में अपना बलिदान दिया है। देर आए दुरुस्त आए। आज मोदीजी ने उनके मुंह पर जोरदार तमाचा मारा जो अपने ही देश के किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, फर्जी किसान कहकर संबोधित कर रहे थे, चाहे वो बीजेपी नेता हो या हो अंधभक्त।

मोदी सरकार का पतन: नवाब मलिक
जिस तरह से आज केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। यकीनन यह देश के किसानों की जीत है। यह शुरुआत है मोदी सरकार के पतन का। आज यह भी साबित हुआ है कि देश में किसी की मनमानी नहीं चलेगी।

अत्याचार हुआ तो फिर सड़क पर उतरेंगे किसान: अन्ना हजारे
कृषि कानून रद्द करने पर वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा, 'कृषि प्रधान भारत देश में किसान आत्महत्या करता है, किसान रास्ते पर उतरता है, किसान आंदोलन करता है, ये दुर्भाग्य भरी बात है। तीन साल से किसान रास्ते पर आंदोलन कर रहे हैं। कृषि कानून वापस होना देश के लिए यह समाधान भरी बात है। हमारे देश की परंपरा है, त्याग करना पड़ता है, बलिदान करना पड़ता है और संघर्ष करना पड़ता है। ये हमारे देश का इतिहास है। अन्ना ने आगे कहा कि अगर आगे किसानों पर अत्याचार हुआ तो फिर से बड़े पैमाने पर किसान सड़कों पर उतरेंगे।

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