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मुंबई में अदालत का अनूठा फैसला:कबूतरों के लिए बालकनी में दाना डालता था एक परिवार, पड़ोसियों की शिकायत पर कोर्ट ने रोक लगाई

मुंबईएक वर्ष पहले
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यह मामला साल 2009 का है, लेकिन कई साल तक अदालत में पेंडिंग रहने के बाद इस पर फैसला अब आया है। - Dainik Bhaskar
यह मामला साल 2009 का है, लेकिन कई साल तक अदालत में पेंडिंग रहने के बाद इस पर फैसला अब आया है।

मुंबई सिविल कोर्ट ने वर्ली इलाके में एक अपार्टमेंट में रहने वाले परिवार को बालकनी में कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगा दी है। सोसाइटी में कबूतरों की संख्या बढ़ने के बाद पड़ोसियों ने इस संबंध में शिकायत की थी।

मामला 2009 में शुरू हुआ। वर्ली की वीनस हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले दिलीप शाह के ऊपर वाले फ्लैट में एक एनिमल एक्टिविस्ट रहने आया। उन्होंने अपनी बालकनी में पक्षियों के बैठने और खाने के लिए एक मेटल ट्रे के जरिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनवाया। दिलीप शाह और उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि इसके बाद सैंकड़ों की संख्या में पक्षी, कबूतर यहां आने लगे। शुरू में पक्षियों को दिया जाने वाला दाना और अन्य खाने का सामान नीचे बुजुर्ग दंपती के फ्लैट की स्लाइडिंग विंडो के चैनल पर भी गिरता था। हालांकि, बाद में टोकने पर यह दाना गिरना बंद हो गया, लेकिन पक्षियों की संख्या और उनका शोर बढ़ता गया।

साल 2011 में अदालत में दर्ज करवाया केस
इसके बाद 2011 में दिलीप शाह ने जिगिशा ठाकोरे और पदमा ठाकोरे के खिलाफ सिविल कोर्ट में केस दायर किया। शाह ने शिकायत में कहा कि यहां आने वाले पक्षियों की बीट और दाने भी नीचे गिरते हैं। इससे उनकी बालकनी में बदबू आती है। दाने बहुत छोटे होते थे, इसलिए उन्हें वहां से साफ करना भी मुश्किल था। स्लाइडिंग विंडो को खोलने बंद करने में भी दिक्कत होने लगी थी।

शिकायत के बाद भी आरोपी ने ध्यान नहीं दिया
बुजुर्ग दंपती का आरोप था कि पक्षियों को दिए जाने वाले अनाज में छोटे कीड़े होते थे, जो उनके घर में आ जाते थे। बुजुर्ग महिला को पहले से ही त्वचा की दिक्कत थी जो ऐसे हालात में और बढ़ गई। उन्होंने इस बारे में कई बार ठाकोरे परिवार को इसकी जानकारी भी दी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उलटे उन्होंने बुजुर्ग दंपती से ही कहा कि पक्षियों को दाना-पानी डालने जैसे दया-भाव के काम में अड़ंगा न लगाएं और पड़ोसी के नाते अनाज नीचे गिरना बर्दाश्त करें। दिलीप शाह ने इसके बाद अदालत जाने का मन बनाया।

'पक्षियों को दाना खिलाना बुजुर्ग दंपती को परेशान करने वाला'
यह मामला जस्टिस एएच लड्डाड के पास गया और उन्होंने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा, 'मेरी राय में पक्षियों को मेटल ट्रे में दाना डालकर खिलाने वाले परिवार का बर्ताव दंपती को परेशान करने वाला है, क्योंकि उनकी बालकनी इस परिवार की बालकनी के ठीक नीचे है।' हालांकि, अदालत ने ठाकोरे परिवार को राहत देते हुए सोसाइटी से एक ऐसी जगह तय करने को कहा है, जहां जाकर ये पक्षियों को दाना खिला सकते हैं। इसी के साथ अदालत ने ठाकोरे परिवार को अपनी बालकनी में पक्षियों को दाना नहीं डालने के लिए कहा है।

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