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बप्पा का महादानी भक्त:पुणे में एक भक्त ने दगडूशेठ हलवाई गणपती को चढ़ाया 10 किलो सोने का मुकुट, तकरीबन 6 करोड़ है कीमत; दान देने वाले ने नहीं बताया अपना नाम

पुणे4 दिन पहले
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इस मुकुट को 10 दिनों तक भक्तों के ऑनलाइन माध्यम से दिखाया जाएगा। इसे दान करने वाले पुणे के एक उद्योगपति हैं और अकसर यहां दर्शन के लिए आते रहते हैं। - Dainik Bhaskar
इस मुकुट को 10 दिनों तक भक्तों के ऑनलाइन माध्यम से दिखाया जाएगा। इसे दान करने वाले पुणे के एक उद्योगपति हैं और अकसर यहां दर्शन के लिए आते रहते हैं।

पुणे समेत पूरे महाराष्ट्र में 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव जारी है। इस बीच बप्पा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के लिए पुणे के एक भक्त ने श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती को 10 किलो गोल्ड से बना एक मुकुट चढ़ाया है। इस मुकुट की कीमत तकरीबन 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है। गोल्ड के अलावा इसमें कीमती माणिक भी जड़े हुए हैं।

गोल्ड के अलावा इसमें कीमती माणिक भी जड़े हुए हैं। इसके निर्माण में तकरीबन 2 महीने का समय लगा है।
गोल्ड के अलावा इसमें कीमती माणिक भी जड़े हुए हैं। इसके निर्माण में तकरीबन 2 महीने का समय लगा है।

नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं दानी

दगडूशेठ हलवाई गणपति मंडल के ट्रस्टी महेश सूर्यवंशी ने बताया कि यह मुकुट पुणे के एक उद्योगपति ने गुप्त दान के रूप में दिया है। वे अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं। वे और उनका परिवार अकसर श्रीमंत के दरबार में दर्शन के लिए आते रहते हैं।

मुकुट पर शंकर और पार्वती की तस्वीर बनी हुई है।
मुकुट पर शंकर और पार्वती की तस्वीर बनी हुई है।

मुकुट बनाने वाले कारीगरों को दिए गए 80 लाख रुपए

इस मुकुट पर बेहद सुंदर कारीगरी की हुई है। मुकुट में भगवान शंकर और मां पार्वती का चित्र अंकित किया गया है। मंदिर ट्रस्टी ने मुकुट के वजन के अलावा अन्य जानकारी देने से मना कर दिया है। वर्त्तमान के हिसाब से इसमें लगे गोल्ड और माणिक की कीमत तकरीबन 5 करोड़ रुपए है। इसके डिजाइन को तैयार करने का मेहनताना तकरीबन 80 लाख बताया जा रहा है।

गणेशोत्सव के दौरान पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ गणपति मंदिर में भारी भीड़ जमा होती है। हालांकि, इस बार कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सिर्फ मंदिर के पुजारियों और ट्रस्टियों को ही अनुमति दी गई है।
गणेशोत्सव के दौरान पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ गणपति मंदिर में भारी भीड़ जमा होती है। हालांकि, इस बार कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सिर्फ मंदिर के पुजारियों और ट्रस्टियों को ही अनुमति दी गई है।
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