अच्छी बारिश न होने से फैला रोग:सोयाबीन को लगा येलो मोजेक महंगे कीटनाशक भी हुए बेअसर

मुंगावली2 महीने पहले
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किसानों को पिछले तीन-चार साल से सोयाबीन फसल में नुकसान हो रहा है। इससे परेशान होकर क्षेत्र के कई किसानों ने इस बार सोयाबीन फसल की जगह बड़ी संख्या में सीधी बोवनी वाली धान की फसल लगाई है। इसके बाद भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों ने सोयाबीन की फसल लगाई है। सोयाबीन की फसल में इस बार फिर किसानों को नुकसान होने का अंदेशा है।

क्षेत्र में सोयाबीन की फसल में येलो मोजेक रोग लगने लगा है। इससे फसल के पत्ते अचानक पीले पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार क्षेत्र में पहले बारिश नहीं होने से फसल में येलो मोजेक फैल रहा है। किसानों ने अपनी फसल को स्वस्थ रखने और अच्छी पैदावार के लिए महंगे दाम पर बीज खरीदकर बोवनी की थी। कुल मिलाकर सोयाबीन अब लगातार घाटे वाली फसल बनती जा रही है।

खरीफ सीजन में ब्लॉक में 50 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल लगाई गई है। क्षेत्र के कई गांव में सोयाबीन की फसल में येलो मोजेक रोग फैल रहा है। इस बीमारी में दवाइयां भी बेअसर हो रही है। इससे किसानों की हालत खराब हो रही है।

बिल्हेरु गांव के किसान संतोष विश्वकर्मा, गुलाब सिंह, मोहन सिंह, भेसोन कला गांव के गजराज सिंह, बचन सिंह, पत्थरगढ़ के किसान प्रयाग सिंह, बलराम सिंह, पर्वत सिंह और धर्मेंद बैस आदि ने बताया कि हमारी सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक नामक बीमारी तेजी से अपना असर दिखा रही है। जिस की रोकथाम के लिए हमने कीटनाशक विक्रेताओं से दवा लेकर उनका छिड़काव किया है। यह दवाइयां इस रोग पर बेअसर साबित हो रही है।

लागत अधिक लाभ कम
किसान फसल लगाते समय महंगे बीज और कीटनाशक का उपयोग करते हैं। वहीं फसल को बीमारियों, इल्लियों से बचाने के लिए महंगी दवा डाली जाती है। इससे फसल की लागत बढ़ रही है। वहीं जब फसल की कटाई का समय आता है तब फसल का उत्पादन कम होने से उन्हें कम लाभ होता है।

इल्ली और खरपतवार की भी मार
वहीं फसल को इल्ली और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए महंगे कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। इसके बाद भी फसल में इल्लियों का प्रकाेप है। वहीं कई जगह फसलों में कचरा बड़ी मात्रा में हो गया है। किसानों ने कचने को नष्ट करने के लिए कचरा नाशक दवा का भी छिड़काव किया इसके बाद भी फसल में कचरा नष्ट नहीं हो रहा है। वहीं कई जगह दवा छिड़कने के बाद किसानों की सोयाबीन की फसल ही मुरझाने लगी है। इससे किसानों को खेती लाभ का सौदा नहीं रहा है।

येलो मोजेक बीमारी से इस तरह करें नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र अशोकनगर के वैज्ञानिक डॉ. वीके गुप्ता ने बताया कि पीला मोजेक रोग की वाहक सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 125 मिली हेक्टर या बीटासायफ्लुथ्रिन +इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली हेक्टर का छिड़काव करें। इसके साथ ही किसान सफेद मक्खी के नियंत्रण केल ए अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टीकी ट्रैप लगाएं।

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