रणजी का खिताब जीतकर रचा इतिहास:जिले के अक्षत ने 5 मैचों में बनाए 270 रन, एक शतक भी लगाया

अशोकनगर5 महीने पहले
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बेंगलुरु में खेले गए फाइनल मुकाबले में 41 बार से चैंपियन मुंबई की टीम को मप्र की टीम ने हराकर पहली बार रणजी का खिताब जीतकर इतिहास रचा है। मप्र को मिली इस जीत में हमारे जिले के होनहार खिलाड़ी का भी अहम रोल रहा है। चैंपियन बनने के बाद मप्र सहित अशोकनगर में भी उत्साह चरम पर रहा। जीत के बाद ढोल ढमाकों के साथ जीत का इजहार किया गया।

खिलाड़ी अक्षत रघुवंशी के घर पर मिठाई बांटकर जीत की खुशी मनाई गई। इस टूर्नामेंट में अक्षत ने 5 मैच खेलते हुए 270 रन बनाए। दरअसल, अक्षत रघुवंशी के पिता केपी रघुवंशी ने बचपन में ही उसकी क्रिकेट के प्रति रुचि देख ली थी। 5 साल की उम्र में रबर की गेंद से क्रिकेट की शुरुआत की थी। अपने बेटे की रुचि को देखते हुए केपी ने संजय स्टेडियम में उसे खिलाना शुरु किया।

इसके बाद उसके पिता इंदौर ले गए। वे अंडर 14 भी खेल चुके हैं। इसके बाद से ही उसके क्रिकेट में सुधार हुआ। रणजी ट्रॉफी में अक्षत रघुवंशी ने 5 मैच खेले, जिनमें 270 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने तीन पर 50 रन एवं 1 बार 100 रन की पारी खेली। अपने गेम्स में हुए सुधार और जीत का श्रेय वे अपने पहले कोच यानी अपने पिता को दे रहे हैं।

अक्षत बोले- कोच ने किया मोटीवेट
बहुत चैलेंजिंग मैच था। सामने मुम्बई की टीम थी, जो 41 बार रणजी ट्रॉफी जीत चुकी थी। उनकी टीम में जो बॉलर थे उनके बड़े नाम थे, लेकिन हमारी टीम बहुत अच्छे से खेली और जीती। इस ऐतिहासिक जीत पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इस मैच से पहले हमारे कोच ने काफी मोटीवेट किया। उन्होंने कहा क्रिकेट में ऐसा कुछ नहीं होता कि बड़े प्लेयर हैं तो जीत जाएंगे। जो जिस दिन अच्छा खेलता है वह जीतता है। अच्छा खेलना है, जीत हार से मतलब नहीं है। आखिर हमारी टीम अच्छा खेली और जीती।

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