कुंडलपुर महा महोत्सव:अमूल्यमति माताजी ने कहा शंखनाद, शहनाई सुप्रभात मंगल का प्रतीक है

अशोकनगरएक महीने पहले
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भगवान के गुण गान के लिए शंखनाद शहनाई वादक ये सब सुप्रभात में जगत के जीवों के मंगल कामना के लिए बजाए जाते हैं। कुंडलपुर महा महोत्सव में आपने शंख की ध्वनि सुनी होगी ये शंख नाद भगवान को केवल ज्ञान की प्राप्ति पर किया गया। यह बात पिपरई रोड़ स्थित विद्याश्री नवीन चैतन्य में आर्यिका रत्न श्री अमूल्य मति माताजी ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा खजुराहो की बात है किसी प्रसंग में आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु के द्वार पर नित्य शहनाई बजनी चाहिए। फिर देखें परिणाम और आपको ज्ञात हो कि खजुराहो में अपूर्व प्रभावना हुए। उन्होंने कहा भक्ति दो प्रकार की होती है।

एक निर्वृति पूर्वक एक प्रवर्ती। श्रावक प्रवृत्ति पूर्वक भक्ति में नृत्य गान भजन कीर्तन करते हुए भगवान की आराधना करते हैं। वहीं निर्वृति पूर्वक भक्ति में श्रमण जिन्हें आप साधु कहते हैं साधु हमेशा निवृत्ति रुप भक्ति करते रहते हैं। सभी को अपनी अपनी भूमिका के अनुसार भगवान की आराधना करना चाहिए।

शाढ़ौरा में होगा माताजी का चातुर्मास
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजयधुर्रा ने बताया कि आर्यिका रत्न अमूल्य मति माताजी, आर्यिका श्री आराध्य मति माताजी, आर्यिकाश्री अलोल्यमति, आर्यिका श्री अनमोल मति, आर्यिका आज्ञा मति माताजी संघ सहित श्री सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर से विहार करते हुए सागर खिमलाशा भानगढ़ मुंगावली होते हुए पिपरई से विद्या श्री दाल मिल स्थित नवनिर्मित जिन चैतन्य पहुंची। आर्यिका संघ का गुरुवार को सुबह नगर प्रवेश होगा। माताजी का चातुर्मास जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर शाढ़ौरा में होने जा रहा है।

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