बसंत पंचमी पर जिले भर में होंगे आयोजन:बच्चों के विद्यारंभ संस्कार की होगी शुरुआत, बैजू बावरा समाधि पर भी होगा कार्यक्रम

अशोकनगर14 दिन पहले
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अशोकनगर में बसंत पंचमी के अवसर पर जिले भर में विधि विधान से कार्यक्रम आयोजित होंगे। ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाता है। इसी वजह से स्कूलों में बच्चों को विद्यारंभ संस्कार का भी शुभारंभ करवाया जाता है। साथ ही बसंत नई फसलों का आगमन का संदेश देकर आती है । बसंत के आने से खेतों में पीली फसलें मुस्कुराते में नजर आती है। वही बसंत पंचमी के अवसर पर ही संगीत सम्राट बैजू बावरा का भी जन्मदिन मनाया जाता है, उनकी समाधि चंदेरी स्थित किला कोठी पर कार्यक्रम का आयोजन होगा।

स्कूलों में सरस्वती का मनाएंगे जन्मदिवस

ज्ञान की देवी मां सरस्वती का बसंत पंचमी के अवसर पर जन्मदिन मनाया जाता है । जिले भर के स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित होंगे । इसके लिए सभी जगह तैयारियां चल रही है । साथ ही बच्चों को स्कूलों में विद्या का शुभारंभ करवाया जाता है ज्ञान की देवी का जन्मदिन के अवसर पर विद्यालय शुभारंभ करवाने का अच्छा महत्व होता है । हजारों बच्चे विद्या का शुभारंभ करते हैं ।

बैजू बावरा की समाधि पर होगा कार्यक्रम

ध्रुपद गायक बैजू बावरा का देहांत बसंत पंचमी के दिन हुआ था । संगीत के सम्राट बैजू बावरा का जन्म चंदेरी में हुआ था। ग्वालियर में मानसिंह के दरबार में गायक रहे, संगीत सम्राट बैजू बावरा आखिरी समय में चंदेरी वापस आ गए थे, और उन्होंने चंदेरी में ही बसंत पंचमी के दिन अंतिम सांस ली थी। जिसकी वजह से किला कोठी के पास उनकी समाधि बनाई गई है । यहां पर प्रत्येक बसंत पंचमी के अवसर पर संगीत कार्यक्रम आयोजित करवाया जाता है।

स्कूलों में बच्चे करेंगे हवन पूजन

मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस पर स्कूलों में बच्चों के द्वारा हवन पूजन किया जाएगा । विद्यारंभ का बड़ा महत्व माना जाता है इसी वजह से स्कूलों के बच्चे हवन पूजन करते हैं । अशोकनगर में बड़े स्तर पर सरस्वती, विवेकानंद सहित अन्य विद्यालयों में मां सरस्वती पूजा पाठ के पश्चात हवन होगा जिसके बाद मां सरस्वती जी के बारे में शिक्षक छात्रों को बताएंगे ।

बसंत में नई फसल का होता है आगमन:बसंत नई फसलों के आगमन का संदेश देती है बसंत के आने से खेतों में पीली सरसों में मुस्कराते हुए नजर आती है बसंत पंचमी के बाद खेतों में जो फसल खड़ी होती है वह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस दिन से फसलों का आगमन शुरू हो जाता है फसले पककर तैयार होने लगती है।

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