भरोसा जीतने आदिवासी लड़कियों से शादी कर रहे नक्सली:MP के जंगलों में 20 करोड़ के इनामी एक्टिव; फर्राटेदार इंग्लिश भी बोलते हैं

भोपाल/ बालाघाट5 महीने पहलेलेखक: योगेश पाण्डे

मध्यप्रदेश के बालाघाट में 3 नक्सल कमांडरों के एनकाउंटर के बाद यहां पांव पसार रहा नक्सलवाद एक बार फिर चर्चा में है। दैनिक भास्कर के पास पक्की खबर है कि बालाघाट और आसपास के जंगलों में वर्तमान में 6 दलम एक्टिव हैं। हर दलम में औसतन 20 मेंबर हैं। पुलिस मुख्यालय के अफसर भी मानते हैं कि बालाघाट और इसके आसपास अब भी 100 से 110 नक्सली एक्टिव हैं।

पुलिस ने नक्सलियों का जो रिकॉर्ड तैयार किया है, उसमें कई के फोटो तक पुलिस के पास नहीं हैं। जिनके फोटो हैं भी, वो 10 से 20 साल पुराने हैं। ऐसे में अगर नक्सली पुलिस के सामने भी आ जाएं, तो पहचानना मुश्किल हो जाएगा। नक्सली गांव में पैठ बनाने और आदिवासियों का भरोसा जीतने के लिए उनकी बेटियों से शादी भी कर रहे हैं।

आदिवासी लड़की से शादी, बाद में कमांडर बनीं

पावेल उर्फ सरवन पहले परसवाड़ा दलम में था, उसने आदिवासी लड़की सुनीता से शादी की। बाद में सुनीता नक्सल कमांडर बनीं। हाल ही में एनकाउंटर में मारी गई रामे से मंगेश ने शादी की थी। मंगेश की मौत के बाद रामे कमांडर बनीं। सबसे पहले मध्यप्रदेश में सूरज टेकाम ने राशिमेटा गांव में आकर एक आदिवासी लड़की से शादी की थी, बाद में वो नक्सल कमांडर बनीं। एनकाउंटर में मारे गए नागेश ने जानकी से विवाह किया था। जानकी से भी उसका रिश्ता नक्सली बनने के बाद हुआ था। 2016 में पुलिस के हत्थे चढ़े 10 लाख की इनामी झीनिया बाई ने पुलिस को बताया था कि दलम में रहते हुए उन्हें शादी की इजाजत होती है लेकिन बच्चे पैदा करने की अनुमति नहीं होती।

एक नक्सली पर करीब 10 से 15 लाख तक का इनाम
मध्यप्रदेश पुलिस रिकॉर्ड में इनमें से ज्यादातर नक्सलियों पर इनाम घोषित है। इनाम की ये राशि 3 लाख से 7 लाख तक है। इनमें से 50 नक्सलियों पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र ने भी अलग-अलग 5 से 10 लाख रुपए के इनाम घोषित किए हुए हैं। तीनों राज्यों में एक नक्सली पर करीब 10 से 15 लाख रुपए तक का इनाम है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि तीनों राज्यों की पुलिस की ओर से नक्सलियों पर 20 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। इनाम की ये राशि नक्सलियों के कैडर के हिसाब से बढ़ती रहती है।

IG एंटी नक्सल सेल, साजिद फरीद शापू कहते हैं कि ये सही है कि 2016 के बाद दलम बढ़े हैं, लेकिन नक्सलियों का दायरा नहीं बढ़ने दिया गया है। कान्हा में सुरक्षा बलों के 2 कैंप बनाकर हमने वहां उनका रास्ता रोक दिया है। 2016 के बाद नक्सलियों ने विस्तार का प्लान बनाया था, उसी प्लान के तहत उनकी एक्टिविटी यहां बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर मदद न मिल पाने के कारण बहुत से नक्सली लौट भी रहे हैं।

3 राज्यों का ट्राई जंक्शन है बालाघाट, इसलिए नक्सलियों का एपिसेंटर

मध्यप्रदेश में बालाघाट नक्सल आंदोलन का अहम केंद्र है, इसलिए यहां नक्सलियों की एक्टिविटी लगातार बढ़ रही है। पहले यहां टांडा और मलाजखंड दलम ही थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 6 हो गई है। इनकी मॉनिटरिंग के लिए दो डिविजनल कमेटी बालाघाट में काम कर रही हैं। यहां नक्सलियों का मूवमेंट बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है कि यहां के जंगल छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और महाराष्ट्र के गोंदिया-गढ़चिरोली के जंगलों से जुड़े हैं। ये ट्राई स्टेट कॉरिडोर नक्सलियों के लिए बेहद मुफीद है। इसी बेल्ट में सबसे ज्यादा आदिवासी गांव भी हैं।

एमपी के जंगलों में 2 डिवीजनल कमेटी और 6 दलम

जीआरबी (गोंदिया-राजनांदगांव-बालाघाट ) डिवीजन

कान्हा भोरम देव डिवीजन– ये छत्तीसगढ़ का है, लेकिन अब यहां सक्रिय।

पुलिस के पास नागेश की जो फोटो थी और वर्तमान में वो जैसा था, दोनों चेहरों में बहुत अंतर है। पुलिस के पास नागेश का 16 साल पुराना फोटो था।
पुलिस के पास नागेश की जो फोटो थी और वर्तमान में वो जैसा था, दोनों चेहरों में बहुत अंतर है। पुलिस के पास नागेश का 16 साल पुराना फोटो था।

नक्सलियों के 6 दलम हैं यहां

  • टांडा दलम
  • दर्रेकसा दलम
  • मलाजखंड दलम
  • विस्तार– 2
  • विस्तार-3
  • खटियामोचा

दलम क्या होता है?

नक्सलियों का ब्लॉक लेवल का स्ट्रक्चर। यह पर्टिकुलर जिस एरिया में काम करते हैं, उसी पर इनका नाम होता है। एक दलम में कमांडर सहित 20 मेंबर होते हैं।

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