धान की फसलों को कीटों का खतरा:खराब हो रही फसलों के बचाव के लिए विभाग कर रहा है प्रयास

बालाघाट12 दिन पहले
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धान फसल में गंगई कीट एवं तनाछेदक के प्रकोप से करीब एक हजार हेक्टेयर में लगी फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बालाघाट विकासखण्ड समेत लालबर्रा, लांजी, किरनापुर, परसवाड़ा समेत अन्य स्थानों पर इन दिनो गंगई कीट एवं तनाछेदक का प्रकोप देखने को मिल रहा है। हालांकि विभागीय तौर पर कीटों के बढ़ते दायरे को लेकर प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर किसानो को सलाह दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि अनुकूलता के बाद ये कीट धान फसल के रोपा लगाए जाने के बाद 40 से 50 दिनों में ज्यादा असर दिखाते हैं। गंगई कीट को बालाघाट जिले की संस्कृति में पोंगा रोग कहा जाता है। जो फसल को नीचे से चट करता है। जिससे पौधे की उर्वरक शक्ति नहीं बढ़ पाती। कृषि वैज्ञानिकों का कहना रहा कि पोगा कीट से बचाव को लेकर किसानों को कार्गो क्यूरान 10 किलो प्रति एकड़ में रासायनिक दवाई का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह रोग इन दिनों हाइब्रिड धान फसल में ज्यादा फैलने की जानकारी मिल रही है।

जिले भर में बढ़ रहा कीटों का प्रकोप

इधर गंगई कीट के बढ़ते प्रकोप के संंबंध में ग्राम नैतरा के सीमांत किसान खूबचंद पटेल का कहना रहा कि इन दिनों गांव-गांव में किसान गंगई कीट के प्रकोप से चिन्तित है। पिछले एक पखवाड़े से धान फसल मे यह रोग देखने को मिल रहा है। दवाईयों का छिड़काव करने के बाद भी इस कीट पर काबू नहीं पाया जा रहा है।

फैक्ट फाइल

  1. जिले में 3 लाख हेक्टेयर में लगी है फसल
  2. 2 लाख 70 हजार हेक्टेयर में लगाई गई है धान फसल
  3. 8 हजार हेक्टेयर में अरहर
  4. 5 हजार हेक्टेयर मे कोदो कुटकी
  5. 10 हजार हेक्टेयर में मक्का
  6. 2 हजार हेक्टेयर में रामतिल की फसलें शामिल है।

राजेश खोब्रागड़े उपसंचालक कृषि ने बतायाधान फसल में गंगई एवं तनाछेदक कीट फैलने की जानकारी मिली है। विभागीय तौर पर प्रांरभिक तौर पर एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा का आंकलन किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को बचाव हो लेकर सलाह दी जा रही है।

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