धर्म:प्रभु के स्मरण से ही छू मंतर हो जाते हैं सभी भय

बड़वानी6 दिन पहले
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ध्यान मुद्रा में मुनिश्री संधान  सागरजी। - Dainik Bhaskar
ध्यान मुद्रा में मुनिश्री संधान सागरजी।

बावनगजा में विराजित मुनिश्री संधान सागरजी ने रविवार को धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा आप जितना डरेंगे, उतना ही डर आपको और डराएगा। इसलिए सबसे बड़ी बीमारी है, डर। भक्तामर व्याख्यानमाल में आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा बताए 8 भय को नियंत्रण करने के उपाय बताते हुए मुनिश्री ने कहा प्रभु के नाम स्मरण मात्र से सब भय छू मंतर हो जाते हैं। प्राचीन व नवीन आख्यान भरे पड़े हैं। जिसमें देखा जो डर गया, वह घर गया। अन्यथा तर गया।

सीता के सामने अग्नि कुंड जलाया गया, नीर बन गया। अग्नि पवित्रता का प्रतीक भी है, जो पवित्र है, उसे अग्नि नहीं जलाती। विभीषण व अशोक वाटिका इसका साक्षात उदाहरण है। मुनिश्री ने कहा एक स्थान पर पंच कल्याणक हो रहा था। आग की घटना घटी। वहीं गंधोदक की टंकी रखी थी। थोड़े से पानी से ही बड़ी आग पर काबू पाया गया। ये सब प्रभु के नाम का प्रभाव है। कई तरह की अग्नि होती है। जंगल की आग को दावाग्नि, समुद्र की आग को बडवाग्नि, क्रोधग्नि, कामाग्नि, जठराग्नि भी होती है। पर सबसे महत्वपूर्ण है तपाग्नि।

तप की अग्नि वह है, जो जलाती नहीं, जिलाती है। मुनिश्री ने कहा अपने जीवन में अग्नि का भय न रखें। बस प्रभु का सदैव स्मरण करते रहे। कैसी भी आग क्यों न हो, वह भगवान के स्मरण, कीर्तन से बुझती है। इसे अपने दिल में स्वीकारने की आवश्यकता है। मीडिया प्रभारी मनीष जैन ने बताया मुनिश्री व क्षेत्र वंदनार्थ के लिए रविवार को सहारनपुर, दिल्ली से सैकड़ों यात्री बावनगजा आए। उन्होंने बड़े बाबा की शांतिधारा कर अपने जीवन को कृतार्थ किया। उनके लिए मुनिश्री ने कहा कि यात्रा का कष्ट कहा नहीं जाता, सहा जाता है। केश लोच के बाद मुनिश्री ने एक उपवास कर लिया। पारोला (महाराष्ट्र) के श्रावकों ने रविवार को पारणा करवाकर पुण्य का संचय किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।

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