कार्यशाला: पीजी कॉलेज में मुख्य वक्ता यादव बोले-:निर्गुण व सगुण धारा की काव्य रचनाओं से समृद्ध हुआ भक्ति साहित्य

बड़वानी2 महीने पहले
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भक्ति काल की निर्गुण व सगुण धारा की काव्य रचनाओं से भक्ति साहित्य समृद्ध हुआ है। भक्ति की निर्गुण परंपरा में संत कवियों द्वारा किए गए समाज सुधार के विभिन्न पहलू जैसे अवतारवाद व आडंबर का विरोध सद्गुरु की महत्ता, मानवता का कल्याण जैसे प्रमुख बिंदु थे। एसबीएन पीजी कॉलेज में मुख्य वक्ता व सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. ओमप्रकाश यादव ने विद्यार्थियों से ये बातें कही। शनिवार को हिन्दी विभाग ने अकादमिक उत्कृष्टता गतिविधियों के अंतर्गत भक्ति काल का इतिहास व उपलब्धियों पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया।

उन्होंने कहा अपने माता-पिता व गुरुजनों के प्रति हमेशा सम्मान व्यक्त करने की भावना रखे। प्राचार्य डॉ. एनएल गुप्ता ने भक्ति काल की समृद्ध साहित्य परंपरा पर विचार रखें। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मंजुला जोशी ने कहां संत साहित्य का समाज पर सकारात्मक प्रभाव से भक्ति काल समृद्ध हुआ।

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