आंदोलन की रणनीति बना:पोटाश के भाव 700 रुपए बढ़ने से किसान आक्रोशित

बड़वानी2 महीने पहले
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सोसायटी में खाद के दाम बढ़ने को लेकर चर्चा करते किसान। - Dainik Bhaskar
सोसायटी में खाद के दाम बढ़ने को लेकर चर्चा करते किसान।

पहले 1000 रु. की आती थी बोरी, अब 1700 रु. हुए दाम, सोसायटी में खत्म हुआ पाेटाश पोटाश खाद के दाम बढ़ने से किसानों में आक्रोश है। वहीं भारतीय किसान संघ के सदस्य आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। पोटाश खाद अब 700 रुपए महंगा हो गया है। पहले 50 किलो की बोरी 1000 रुपए में मिलती थी, जो अब 1700 रुपए में मिल रही है।

वहीं बड़वानी सोसायटी में पोटाश का स्टॉक खत्म हो गया है। इसके चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पोटाश के साथ अन्य खाद के दाम भी बढ़े हैं। अधिकारियों ने बताया कंपनी स्तर पर खाद के दाम बढ़े हैं। डीजल व भाड़ा बढ़ने के कारण भी खाद महंगी होने की संभावना जताई है।

किसानों ने बताया सरकार एक ओर खेती को लाभ का धंधा बनाने कास दावा करती है। वहीं दूसरी ओर कंपनियों द्वारा मनमर्जी कर खाद के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। लेकिन कंपनियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। इसके चलते किसानों को ज्यादा दाम पर खाद खरीदना पड़ रही है।

किसान कालूसिंह भिड़े, कैलाश कन्नौजे, रूखड़िया धनगर व सुरेश कन्नौजे शनिवार को बड़वानी सोसायटी में पोटाश, डीएपी व यूरिया खाद लेने आए थे। लेकिन स्टॉक खत्म होने से किसानों को पोटाश खाद नहीं मिला। उन्होंने बताया फसलों के लिए पोटाश की जरुरत है। लेकिन सोसायटी में पोटाश खाद नहीं है।

उधर, भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष मंशाराम पंचोले ने बताया सोसायटियों में पोटाश का स्टॉक नहीं है। इसके चलते बाजार से ब्लैक में 1750 रुपए में लेना पड़ रहा है। कुछ सोसायटी में पुराने रेट का स्टॉक होने के बाद भी खाद नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह 500 मीट्रिक टन सुपर फास्फेट पुराने रेट का स्टॉक है।

लेकिन सोसायटी कर्मचारी नए रेट में बेच रहे हैं। खाद के दाम बढ़ने पर आगामी दिनों में तहसील मुख्यालयों पर अधिकारियों को आवेदन देकर विरोध जताएंगे। साथ ही धरना आंदोलन करेंगे।

उत्पादन व चमक के लिए जरूरी है पोटाश
केला, पपीता, गन्ना, प्याज, मक्का, कपास, सहित अन्य सब्जियों में पोटाश खाद का उपयोग किया जाता है। किसानों ने बताया पोटाश डालने से फसल के दाने पर चमक आने के साथ वजन बढ़ता है। पत्ते पीले नहीं पड़ते। उत्पादन बढ़ता है।

एक हैक्टेयर में 125 किलो यानी ढाई बोरी पोटाश डालते हैं। केले में एक हैक्टेयर 6 से 8 बोरी व गन्ने में 1 हैक्टेयर पर तीन बोरी पोटाश की खपत होती है। जबकि सब्जियों में पांच बोरी खाद देना पड़ता है।

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