नपा ने शिक्षा विभाग को दिया नोटिस:मठ स्कूल भवन को आदिवासी लोक व कला संग्रहालय बनाकर करें संरक्षित

बड़वानी2 महीने पहले
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नवजात का वजन कम है लेकिन वो स्वस्थ है। - Dainik Bhaskar
नवजात का वजन कम है लेकिन वो स्वस्थ है।

डॉ. यादव बोले- परमाणु वैज्ञानिक डॉ. काकाेड़कर ने इसी स्कूल से ली थी प्राथमिक शिक्षा जर्जर हो चुके मठ स्कूल भवन को नपा ने तोड़ने के लिए शिक्षा विभाग को नोटिस दिया है। खबर प्रकाशित होने के बाद इतिहासकार व पूर्व कुलपति डॉ. शिवनारायण यादव ने प्रशासन से मांग की है कि इसकी मरम्मत करवाकर आदिवासी लोक-कला संग्रहालय के रूप में स्थापित किया जाए।

यह मठ भवन 200 साल से भी ज्यादा पुराना है। भारतीय परमाणु आयोग के चेयरमैन रहे डॉ. अनिल काकाेड़कर ने इसी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा हासिल की थी। रियासतकाल में राज शासक के दीवान व गुरु मौजगिरी ने इस मठ का निर्माण करवाया था। बाद में उनके उत्तराधिकारी व संत इसमें रहते थे। फिर इस भवन में प्रायमरी स्कूल का भी संचालन किया गया।

डॉ. यादव ने बताया मठ भवन लकड़ी से बना है, जो सेंट्रल इंडिया का एकमात्र भवन है। सेंट्रल इंडिया स्टेट गजेटियर सीरिज में सीई लुआर्ड नामक अंग्रेज अधिकारी ने बड़वानी स्टेट गजेटियर के पृष्ठ क्रमांक 40 पर लिखा है कि बड़वानी में 100 वर्ष से अधिक पुराना मठ भवन उल्लेखनीय है। यह गजेटियर 1909 ई. में प्रकाशित हुआ है।

उन्होंने बताया मप्र पुरातत्व विभाग का नियम है कि 100 वर्ष से पुराना भवन या स्मारक उनके विभाग की संपत्ति बन सकती है। यदि वह कला दृष्टि से महत्वपूर्ण हो। इस भवन में सुंदर नक्काशी की गई है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में जिले के दर्शनीय स्थलों को रेखांकित करते हुए बड़वानी दर्शन नामक पुस्तक प्रकाशित की है।

इसमें भी मठ भवन का चित्र व ऐतिहासिक महत्व दर्शाया है। ऐसे में मठ को जर्जर बताकर तोड़ने का निर्णय उचित नहीं है। इस भवन की मरम्मत करवाकर इसे आदिवासी लोक-कला संग्रहालय के रूप में स्थापित किया जाना उचित होगा।

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