मां का अंतिम संस्कार:आदिवासी समाज में दफनाने की परंपरा, बेटियाें की इच्छा पर दी गई मुखाग्नि

आठनेर24 दिन पहले
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मां का अंतिम संस्कार करती बेटियां - Dainik Bhaskar
मां का अंतिम संस्कार करती बेटियां

अाठनेर से करीब 15 किमी दूर हिड़ली गांव में बीमारी से तंग एक आदिवासी महिला प्रमिला उइके 55 का निधन हाे गया। उनकी अंतिम विदाई से पूरा गांव गमगीन हाे गया। अादिवासी समाज में मिट्टी देने यानी दफनाने की परंपरा है, लेकिन दोनों बेटियों ने अपनी मां को मिट्टी की जगह दाह संस्कार करने का निर्णय लिया। आदिवासी समाज के प्रमुखाें ने भी दोनों बेटियों के साथ दिया। अंतिम संस्कार के लिए दोनों बेटियां अपनी मां के पार्थिव शरीर को लेकर श्मशान स्थल पहुंचीं। दोनों बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी। दाह संस्कार कर बेटियों ने जीवन अाैर अंितम संकार के दाैरान बेटे की कमी नहीं होने दी। इन दोनों बेटियों ने बेटे का पूरा फर्ज निभाया अाैर पूरे रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया। इस दाैरान जिला पंचायत सदस्य रामचरण इरपाचे, सरपंच रामा इवने सहित सामाजिक बंधु अाैर आस-पास के ग्रामों से आए परिजन लोग शामिल हुए। सभी ने उनके निर्णय अाैर साहस की प्रशंसा की।

पूर्व जनपद अध्यक्ष रामचरण इरपाचे, सरपंच रामा इवने ने बताया कि आदिवासी समाज संस्कृति में अग्नि देने की प्रथा नहीं है। मिट्टी दी जाती है, यानी दफनाया जाता है। दोनों बेटियों की इच्छा अग्नि देने की थी इसीलिए प्रमिला उईके को मुखाग्नि बेटियों ने दी।

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