पिता ने कटार से काटा बेटे का गला:जींस बांधकर रोका खून, पैर पकड़कर घसीट कर ले गए और झाड़ियों में फेंका

मुलताईएक महीने पहले
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मुलताई में मिली लाश के मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि युवक की हत्या उसके ही माता पिता ने की है। युवक शराब पीने का आदी था। इसलिए उसके घर वालों ने ही उसे जान में मारकर उसकी लाश फेंक आए।

एसडीओपी नम्रता सोंधिया ने बताया कि 13 अक्टूबर को कुसुम बिंझवे (55) ने सूचना दिया कि घर के पीछे उसके बेटे संतोष बिंझवे (28) का मिला है। गले पर धारदार हथियार से चोट के निशान हैं। घटना की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई तथा सूचना पर थाना आमला में मर्ग कायम किया है।

ये है पूरा मामला

मामले की गंभीरता देखते हुए SP ने मौका मुआयना किया। मृतक के माता पिता आपस में विरोधाभाषी बयान दे रहे थे। मृतक के पिता अभिराम के शरीर पर कुछ चोट के निशान भी पाए थे। हत्या से संबंधित सभी संभावनाओं पर विवेचना करने के बाद ये स्पष्ट हो गया कि मृतक संतोष बिंझवे की हत्या उसके परिजनों द्वारा ही की गई है। घटना के समय मृतक के घर में उसके पिता अभिराम और माँ कुसुम बिंझवे के अतिरिक्त अन्य कोई और नहीं था । माता–पिता को तलबकर पूछताछ की। उन्होंने गुमराह करने का प्रयास भी किया। आखिर में मृतक के पिता अभिराम ने हत्या करना स्वीकार कर लिया।

इसलिए की हत्या

आरोपियों ने बताया कि उनका बेटे संतोष का व्यवहार अच्छा नहीं था। वह कई सालों से उनके साथ शराब पीकर मारपीट करता आ रहा था। अभी तक करीबन 8–10 बार मारपीट कर चुका है। 25 सितंबर को भी मृतक ने अपने पिता अभिराम को शराब पीकर कुल्हाड़ी से मार दिया था। जिससे उसका दाहिना कान कट गया था। इस कारण वह काम करने अहमदाबाद भाग गया था। पहले एक हाथ भी तोड़ दिया था। जब वह 10 अक्टूबर को संतोष अहमदाबाद से वापस ससाबड़ आया तो घर में बैग रखकर चचेरे भाई राजेश के घर रहने आमला चला गया। 12 अक्टूबर को शाम 7 बजे घर आया तो शराब पीने के लिए पैसे मांगे। मना किया तो उसने माता पिता को लकड़ी से पीटा। जिससे पिता अभीराम के चेहरे एवं पसली में चोट लग गई थी। मां कुसुम ने जब 100 रुपए दिए तो वह दोस्तों के साथ शराब पीने चला गया। रात करीब 10.30 बजे संतोष नशे की हालत में घर वापस आया तो फिर से गालियां देकर मां-बाप को मारने लगा। नशे की हालत में चूल्हे के पास लेटकर अनाप शनाप बड़बड़ाने लगा तो पिता ने घर मे रखी कटार से उसका गला काट दिया और खून न बहे इसलिये उसी की एक जींस से गले में बांध दिया।

रात करीब 1 बजे पिता अभिराम ने मृतक संतोष के दोनों पांव पकड़ा और माँ ने उसके दोनों हाथ पकड़े और पीछे के दरवाजे से निकालकर लाश को धीरे धीरे खींचते हुए घर के पीछे की तरफ ढलान में कच्ची रोड़ के किनारे तक लेकर गए और लाश फेंक दिया। झाड़ियों में जींस फेंककर दोनों घर आ गए।

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