दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा में प्रकाश पर्व 23 से:गोहद में निकाला नगर कीर्तन, गुरु ग्रंथ साहब​ के ​दर्शन कर मात्था टेका​​​​​

गोहद (भिंड)7 दिन पहले

ग्वालियर के प्रसिद्ध दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा में प्रकाश पर्व अमावस्या पर 23 सितंबर से मनाया जाएगा। चंबल अंचल के विभिन्न ग्रामों से पंच प्यारे, गुरु ग्रंथ साहब को लेकर नगर कीर्तन निकाला गया। रविवार काे गोहद क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों से नगर कीर्तन ग्राम संगत संत बाबा रामदास जी महाराज गुरुद्वारा फतेहपुर के नेतृत्व में निकाला गया।

किला दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा पर 23-25 सितंबर कार्यक्रम होंगे। इससे पहले जगह-जगह नगर कीर्तन से निकाले जा रहे हैं। गोहद चौराहा, बूटी कुईया, बारा हेड पेड़ा चक, चंदोखर, रायपुरा, फतेहपुर स्टेशन का पुरा, बंद वाला पुरा, श्याम सिंह का पुरा, मालनपुर इत्यादि स्थानों पर जगह-जगह शिफ्ट समाज के नगर कीर्तन का स्वागत किया गया। इस दौरान नगर कीर्तन में हजारों सिख समाज के नागरिक सम्मिलित हुए हैं।

ग्वालियर से गुरु हरगोविंद सिंह जी का गहरा नाता

संत बाबा राम दास जी महाराज फतेहपुर ने बताया कि गुरुद्वारा स्थापना 400 साल पूर्ण होने पर 3 दिन का यह प्रकाश पर्व मनाया जाता है। यह सिख धर्म का महत्व तीर्थ स्थल है। इस गुरुद्वारे की स्थापना गुरु हरगोबिंद जी और जहांगीर से जुड़ी है। यहां से सिख धर्म के छठे गुरु का गहरा नाता रहा है। मुगल शासक जहांगीर ने ग्वालियर किले में गुरु को नजरबंद करवा दिया था। उन्होंने जहांगीर की कैद में 2 साल 3 महीने गुजारे थे। गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ उन्हीं की याद में बनाया गया है।

गुरु ने 52 हिंदू राजाओं को भी मुक्त कराया था। वे सभी अमृतसर तक पैदल गए थे। जहां उनका स्वागत आतिशबाजी और दीप जलाकर किया गया था। उसी प्रथा को आज भी कायम रखते हुए, प्रतिवर्ष ग्वालियर स्थित गुरुद्वारा पर अमावस्या के दिन विशेष भजन कीर्तन आदि का आयोजन उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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