भागवत कथा:ठाकुर ने कहा बच्चों को संस्कारवान बनाएं

गोहद13 दिन पहले
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गोहद क्षेत्र के कंचनपुर गांव में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। कथा के पांचवे दिन भगवताचार्य देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। हजारों की संख्या में भक्तों ने कथा का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कार लाएं। कथा की शुरुआत करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि लोग कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने साथ-साथ दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।

मनुष्य जब अभिमान करता है तो वह दुखी होता है। हमारे दुखों का कारण अहंकार है। व्यक्ति जब अहंकार की सीढ़ी चढ़ जाता है तो उसे भला-बुरा और अपना-पराया नहीं दिखता। इसका सबसे अच्छा मार्ग है ईश्वर की भक्ति। भक्ति करने वाला अहंकारी नहीं हो सकता। उन्होंने पूतना चरित्र का वर्णन करते कहा कि पुतना कंस की भेजी राक्षसणी थी।

पुतना कृष्ण को विषपान कराने के लिए एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर वृंदावन में पहुंची थी। जब पूतना भगवान के जन्म के छह दिन बाद प्रभु को मारने के लिए अपने स्तनों पर कालकूट विष लगा कर आई तो मेरे कन्हैया ने अपनी आंखें बंद कर ली।

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