आंगनबाड़ी केंद्र भवन हुए जर्जर:जर्जर भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र

अकाेड़ाएक महीने पहले
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प्रदेश सरकार छोटे-छोटे बच्चों के अच्छे विकास,पोषण और आरंभिक शिक्षा के पीछे बहुत बड़े पैमाने पर पैसे बहा रही है। इस काम के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं। ऐसे में बहुत सारे आंगनबाड़ी तो सुचारू रूप से संचालित होते हैं,लेकिन कई ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं, जिनकी स्थिति देखकर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लग जाते हैं।

अकोड़ा कस्बे के वार्ड क्रमांक 4,5 और 13 में बने आंगनबाड़ी केंद्र भी उन्हीं में से एक है, जो अव्यवस्थाओं की मार झेल रहा हैं। कस्बे के वार्ड क्रमांक 4,5 और 13 में बने आंगनबाड़ी केंद्र के भवन लगभग 4 साल पहले बनाए गए थे। लेकिन ये भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा हैं। यही नहीं आए दिन भवन के अंदर जहरीले जीव-जंतु घुस जाते हैं।

भवन जर्जर हो चुका हैं। इसके बाद भी इस भवन में आंगनबाड़ी चल रही हैं। 4 साल पहले बने इस भवन की दीवारों में मोटी-मोटी दरारें आ गई हैं। इससे दीवारें कमजोर पड़ने लगी हैं। कस्बे के लोग बताते हैं कि चार साल पहले तीनों आंगनबाड़ी भवन 8-8 लाख रुपए की लागत से बनाए गए थे।

वार्ड क्रमांक 5 का आंगनबाड़ी भवन का अधिकांश हिस्सा तो जमीन के अंदर धंस गया है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घर से आंगनबाड़ी चला रही है। इन जर्जर भवनों को देखकर ऐसा लगता है कि यह कभी भी धराशायी हो सकती हैं। प्रशासन को बच्चों का ध्यान रखते हुए इन की मरम्मत कराना चाहिए।

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