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कैसे रुकेगी बिजली चोरी:बिजली चोरी वाले इलाकाें में ईमानदारी से बिल चुकाने वालों को एवरेज बिल, ताकि घाटे की भरपाई हो सके

भिंडएक महीने पहले
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  • 12 हजार उपभाेक्ताओं के यहां मीटर ही नहीं, तीस हजार कनेक्शनधारियों में से आधे ही बिल भरते हैं
  • शहर के तीस से अधिक इलाकों में 50% से ज्यादा बिजली चाेरी, ईमानदारों से कर रहे वसूली

शहर में बिजली चोरी रोकने में भले ही बिजली कंपनी नाकाम साबित हो रही है। लेकिन वह अपने घाटे की भरपाई के लिए एवरेज बिल थमाकर ईमानदार उपभोक्ताओं की कमर जरूर तोड़ रही है। स्थिति यह है कि शहर में 12 हजार उपभोक्ताओं के यहां मीटर ही नहीं लगे हैं।

वहीं 30 हजार उपभोक्ताओं के यहां मीटर तो लगे हैं। लेकिन इनमें भी चोरी न रुकने की वजह से 50 फीसदी उपभोक्ताओं को कंपनी एवरेज बिल थमा रही है। दरअसल, कंपनी अपने घाटे की भरपाई एवरेज बिल से कर रही है। सबसे ज्यादा एवरेज बिल उन इलाकों में दिए जा रहे हैं, जहां सबसे ज्यादा चोरी होती है। शहर में ऐसे तीस इलाके हैं।

यहां बता दें कि शहर में हर महीने दो करोड़ 10 लाख यूनिट की खपत होती है। जबकि कंपनी बमुश्किल 96 से 97 लाख यूनिट की बिलिंग कर पाती है। शेष एक करोड़ 13 लाख यूनिट चोरी चली जाती है। इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को जानबूझकर एवरेज बिल थमा रही है। इसका खामियाजा उन उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है, जो बिजली की चोरी न कर ईमानदारी से उसका उपभोग कर रहे हैं। हालांकि कंपनी के अफसरों की मानें तो ज्यादातर उपभोक्ता मीटर लगा होने के बाद भी केबल में कट करके अथवा खंबों से सीधे दूसरी केवल डालकर बिजली चोरी कर रहे हैं। इस वजह से उन्हें ऐसे उपभोक्ताओं को एवरेज बिल देना पड़ते हैं।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा चोरी

यूं तो शहर में 50 फीसदी बिजली चोरी हो रही है। लेकिन शहर के गायत्री मंदिर मार्ग, अटेर रोड, वीरेंद्र नगर, धर्मपुरी, मेला, यदुनाथ नगर, लहार रोड, बायपास रोड पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी होती है। कंपनी के अफसरों की मानें तो यहां चोरी का प्रतिशत 70 से ऊपर है। ऐसे में मजबूरन उन्हें एवरेज बिल देना पड़ते हैं।

ऐसे समझें.... बिजली कंपनी का एवरेज बिल का गणित

बिजली कंपनी ने बिजली चोरी पकड़ने के लिए अब ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगा दिए है, जिससे कंपनी यह पता करती है कि इस ट्रांसफार्मर पर कितने यूनिट बिजली की खपत हुई। उदाहरण के ताैर पर हाउसिंग कॉलोनी में रखे 100 केवी के ट्रांसफार्मर से 40 घरों को कनेक्शन दिया गया है। एक महीने में इस ट्रांसफार्मर पर 20 हजार यूनिट की खपत हुई। जबकि इससे कनेक्शन लेने वाले सभी घरों के मीटर में 10 हजार यूनिट ही खपत आई। ऐसे में बिजली कंपनी शेष 10 हजार यूनिट को उक्त ट्रांसफार्मर से जुड़े सभी 40 घरों में विभाजित कर उनका एवरेज बिल भेजती है। इससे नुकसान उन उपभोक्ताओं को होता है, जिनके यहां बिजली की खपत कम है। लेकिन पड़ोसी के द्वारा चोरी करने की वजह उन्हें भी उसका भार झेलना पड़ रहा है।

बिजली चोरी.... एक किलो वाट के कनेक्शन पर चल रहे थे चार एसी

वर्तमान में बिजली कंपनी बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत दो दिन पहले कंपनी का अमला इटावा रोड पर चेकिंग कर रहा था तो एक घर में चोरी से चार एसी चलते हुए पकड़े गए। जबकि इस घर में एक किलोवाट का कनेक्शन था। साथ ही उनका बिल 200 यूनिट तक का आ रहा था। इसी प्रकार से राजहोली इलाके में जब कंपनी की टीम चोरी पकड़ने गई तो लोग बोले उन्हें कनेक्शन नहीं मिल रहे हैं। कई बार आवेदन भी कर चुके हैं। लेकिन जब कंपनी दूसरे दिन यहां शिविर लगाया तो एक भी व्यक्ति कनेक्शन लेने के लिए नहीं आया। इधर बिजली की चोरी की वजह से फाॅल्ट की समस्या बढ़ गई है। स्थिति यह है कि बार-बार केबल जलने, डीओ टूटने तो ट्रांसफार्मर फुंकने की वजह से बिजली सप्लाई ब्रेक हो रही है।

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