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  • Deposit 50 Thousand Rupees In The Legal Cell And The Same Amount In The Employee's Account

हाईकोर्ट का आदेश:50 हजार रुपए विधिक सेल और इतनी ही राशि कर्मचारी के खाते में जमा करें

भिंड/ग्वालियरएक महीने पहले
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  • इंडस्ट्रियल कोर्ट ने सितंबर 2002 में विभाग को दिया था वेतन का भुगतान करने का आदेश

पीएचई विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए फौजाराम के मामले में शासन को अपील करना भारी पड़ गया। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पीएचई विभाग को उन्हें लगभग सवा तीन लाख रुपए मय ब्याज के भुगतान करने का आदेश दिया।

स्पष्ट किया कि ब्याज की राशि चीफ इंजीनियर के वेतन अथवा पेंशन की राशि से वसूली जाए। इस आदेश के खिलाफ शासन ने अपील की, लेकिन कोर्ट ने राहत देने के स्थान पर अपील को खारिज कर दिया। साथ ही शासन को 30 दिन के भीतर 50 हजार रुपए लीगल एड सेल में और 50 हजार रुपए याचिकाकर्ता के खाते में जमा करने का आदेश दिया। शासन को इसके अलावा विधिक सेवा प्राधिकरण को 200 ट्रीगार्ड भी देने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी की, कहा- शासन ने न्यायालय का कीमती समय बर्बाद किया

जस्टिस शील नागू और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने कहा- शासन ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए न्यायालय का कीमती समय बर्बाद किया। एडवोकेट विवेक मिश्रा ने बताया कि 1982 में फौजाराम को पीएचई विभाग में दैनिकवेतन भोगी के पद पर नियुक्त किया गया। 1992 में उन्हें निलंबित कर दिया गया, जिसे उन्होंने न्यायालय में चुनौती दी। 1998 में श्रम न्यायालय ने फौजाराम के पक्ष में फैसला सुनाया और विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे न केवल उन्हें पुन: बहाल करें बल्कि निलंबित रहने के दौरान की अवधि का भुगतान भी करें।

इस आदेश को इंडस्ट्रियल कोर्ट में भी चुनौती दी, लेकिन शासन को 2002 में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद फौजाराम ने कई बार विभाग को अभ्यावेदन दिया, जिस पर विभाग ने माना कि उन्हें 3.25 लाख रुपए राशि का भुगतान करना है। लेकिन वरिष्ठ अधिकारी भुगतान करने का आदेश जारी नहीं कर पाए। सरकारी वकील ने भी विधिक राय देते हुए फौजाराम को राशि का भुगतान करने का अभिमत दिया। लेकिन विभाग ने भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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