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खतरा बढ़ा:हाईवे किनारे के कस्बों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा, गांवों में रोज 8 से 10 मौतें

भिंड12 दिन पहले
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  • ग्वालियर में कोरोना ने पैर पसारे, यहां के लोगों का गोहद-मेंहगांव में आना जाना लगा रहता है

जिले से गुजरे नेशनल हाईवे-719 की ग्वालियर-भिंड-इटावा रोड के किनारे कोरोना संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। खासकर ग्वालियर से लेकर भिंड तक हाईवे किनारे के कस्बों में तेजी से कोविड के मरीज मिल रहे हैं। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि ग्वालियर में कोरोना पैर पसार चुका है। वहीं भिंड के बाद गोहद और मेहगांव ब्लॉक के लोगों का ग्वालियर काफी आना जाना रहता है, जिससे इन इलाकों में संक्रमण की रफ्तार बढ़ी हुई है। वहीं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हर रोज 8 से 10 लोगों की मौत हो रही है।

जिले में शहरी क्षेत्र के बाद अब ग्रामीण इलाके में भी कोरोना वायरस का संक्रमण फैल गया है। पहली बार एक महीने (अप्रैल) में 837 लोगों कोरोना संक्रमण की चपेट में आए। हालांकि इनमें ज्यादातर मरीज होम आइसोलेट होकर स्वस्थ्य हुए। वहीं अप्रैल महीने में कोरोना संक्रमण की वजह से सबसे ज्यादा 8 मौतें भी हुई। इसके अलावा 10 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों की मौत भी अस्पताल में हुई। वहीं जिले भर में देखा जाए तो हर रोज 8 से 10 संदिग्ध मरीजों की मौत हो रही है, जिनका डाटा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। कारण वे कोरोना के डर से दवा लेने अस्पताल ही नहीं आए और झोलाछाप डाक्टर अथवा घरेलू नुस्खों का उपयोग करते रहे।

  • 273 कोरोना एक्टिव केस हैं जिले में
  • 30 कुल कंटेनमेंट ज़ोन बनाए गए हैं जिले में
  • 22 कंटेनमेंट जोन नगरीय क्षेत्र में बनाए गए हैं
  • 09 कंटेनमेंट जोन हैं ग्रामीण क्षेत्र में

भिंड के बाद गोहद और मेहगांव में सबसे ज्यादा मरीज, रौन में कम
वर्तमान में जिले के अंदर कोरोना के 274 एक्टिव मरीज हैं, जिसमें सबसे ज्यादा संक्रमित भिंड विकासखंड में 121 हैं। यानि कोरोना संक्रमण के मामले में भिंड ब्लॉक जिले का हॉट स्पॉट बना हुआ है। वहीं भिंड के बाद गोहद और मेहगांव विकासखंड में भी सबसे ज्यादा 47-47 एक्टिव मरीज है। यह भी कहा जा सकता कि अब ये दोनों ब्लॉक की हॉट स्पॉट बनते जा रहे है। वहीं सबसे कम मरीज स्टेट हाईवे भिंड गोपालपुरा पर स्थित रौन कस्बे में 2 हैं। जबकि लहार में 32 और अटेर में 25 एक्टिव मरीज हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में बीमार हाेने पर घरेलू उपचार करते हैं लोग, यह देरी घातक
इन दिनों मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर बीमार मरीज उपचार के लिए दो से चार दिन तक घरेलू नुस्खे अपनाते है। फिर किसी निजी क्लीनिक में जाकर उपचार लेते हैं। ऐसे में मरीज की हालत ओर अधिक खराब हो जाती है। समय रहते यदि वे किसी योग्य चिकित्सक के पास पहुंच गए तो उनकी जान बच जाती है। वरना उनकी मौत हो जाती है। वहीं इन मौतों की सूचना जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के पास तक भी नहीं पहुंच पाती है। जानकारों की मानें तो इस तरह पूरे जिले में आठ से दस मौतें हो रही है।
दूसरे शहरों से आने वालों से कोरोना संक्रमण का रहता है ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड सीएमएचओ और एमडी मेडिसिन डॉ. विनोद सक्सेना का कहना है कि 15 मिनट तक लगातार मरीज के पास बैठने से और छह फीट की दूरी से कम में लोगों से मेल-मिलाप करने पर कोविड वायरस के संक्रमण का खतरा रहता है। यदि कोई संक्रमित या संदिग्ध है। जिले में स्वास्थ्य संसाधन कम होने से जांच भी सीमित हो रही है। सबसे ज्यादा भिंड शहर के अलावा गोहद , मेहगांव के लोगों को सर्तक रहने की जरूरत है। इन क्षेत्रों में बाहर से आने वालों की संख्या ज्यादा रहती है, इसलिए संक्रमण इन क्षेत्रों में ज्यादा फैल रहा है।

महामारी रोकने संपूर्ण लॉकडाउन की जरूरत

स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड सीएमएचओ राकेश शर्मा का कहना है कि अब जरूरत है संपूर्ण लॉकडाउन की। जब तक लॉकडाउन सख्ती से नहीं लगेगा, तब तक संक्रमण की चेन नहीं टूटेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मौत हो रही है। जिले में स्वास्थ्य संसाधन सीमित हैं। इसलिए लॉकडाउन के बाद ही रोग को नियंत्रित किया जा सकता है

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