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परिवार में 50 साल बाद बेटी जन्मी, उत्सव:ढोल-ताशे के साथ घर लाए, रास्ते में फूल बिछाए, तुलादान कराया; कभी चंबल में बच्ची की किलकारी पर छा जाती थी खामोशी

भिंड2 महीने पहले
बिटिया का तुलादान करते हुए।

यह चंबल ही है, जहां प्रदेश में सबसे कम बेटियां हैं। पहले यहां बच्ची के जन्म पूरे घर में मातम छा जाता था। बेटी की आवाज खामोश कर दी जाती थी, लेकिन अब बदलाव आ रहा है। बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाई जा रही हैं। ऐसा ही कुछ भिंड के मेहगांव में सुशील शर्मा के घर हुआ। उनके कुटुम्ब में 50 साल बाद बेटी का जन्म हुआ। बेटी के जन्म के बाद घर आकर फूल बरसा की गई। स्वागत में फूल बिछाए गए और तुलादान कराया। लाड़ली लक्ष्मी का स्वागत करते हुए पद चिह्न लिए गए। बेटी के जन्म के बाद गृह प्रवेश के दौरान जश्न का माहौल रहा। परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे को बेटी के आगमन पर बधाई दी।

बता दें कि जनगणना 2011 के अनुसार मध्यप्रदेश के भिंड जिले में कुल जनसंख्या के हिसाब से सबसे कम 1 हजार पुरुषों पर 838 महिलाएं थीं। इसके बाद मुरैना जिले में 1 हजार पुरुषों पर 839 महिलाएं थीं।

भिंड जिले के मेहगांव में रहने वाले सुशील शर्मा और रागिनी शर्मा के घर 16 सितंबर को कन्या का जन्म हुआ था। सुशील शर्मा के घर इसके पहले बुआ का जन्म हुआ था। इसके बाद उनके कोई बहन नहीं थी। सुशील, मन ही मन बहन की कमी हमेशा महसूस करते आ रहे थे। बेटी का जन्म ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में हुआ।

यह जानकारी सुशील के पिता प्रदीप शर्मा द्वारा स्थानीय स्तर पर बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाने वाली समाजसेवी संस्था कैंप के सदस्यों को दी। इसके बाद कैंप संस्था के सदस्य मेहगांव सुशील के घर आए। सर्वप्रथम बेटी के आगमन रास्ते में फूल बिछाए। तुलादान किया। पैरों के पद चिह्न लिए। इसके साथ ही गाजे-बाजे के साथ गृह प्रवेश कराया गया।

बिटिया का गृह प्रवेश की रस्म में कलश पूजन के साथ हुआ।
बिटिया का गृह प्रवेश की रस्म में कलश पूजन के साथ हुआ।

बेटी के स्वागत दृश्य देखने आए नगर के लोग
मेंहगांव कस्बे में बेटी के जन्म के बाद प्रवेश उत्सव मनाया गया। समाज सेवी संस्थान के पदाधिकारी ने क्षेत्रीय लोगों को आने का आमंत्रण दिया। इसके बाद उत्सव देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। सुशील शर्मा के मुताबिक बिटिया के स्वागत के लिए उन्होंने कैंप के सदस्यों से संपर्क कर उनको अपने यहां आमंत्रित किया। करीब 3 घंटे की तैयारी और लाडली को गाजे बाजे के साथ गृह प्रवेश कराया।

अब बेटी के जन्म पर लोग उत्सव मनाने लगे
समाज सेवी संस्था के प्रमुख तिलक सिंह भदौरिया ने बताया कि समाज में बेटों से बढ़कर बिटियों का महत्व होता है। बेटा-बेटी में फर्क को दूर करने के लिए कैंप संस्था काम कर रही है। ग्वालियर चंबल संभाग में अब तक करीब 60 बेटियों का इस तरह संस्था स्वागत कर प्रवेश करा चुकी है। इस संस्थान से लगातार लोग जुड़ रहे हैं और बेटी जन्म पर उत्सव मनाने लगे हैं।

बिटिया के स्वागत में बिछाए गए फूल।
बिटिया के स्वागत में बिछाए गए फूल।
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