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इसलिए रहे फिसड्‌डी:प्लांट न होने से 500 से ज्यादा अंकों का हुआ नुकसान, ये मिलते तो टॉप 100 में होता भिंड

भिंड2 महीने पहले
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4 साल पहले जैविक खाद बनाने के लिए खरीदी कंपोस्ट मशीन, अब तक ताले में बंद। - Dainik Bhaskar
4 साल पहले जैविक खाद बनाने के लिए खरीदी कंपोस्ट मशीन, अब तक ताले में बंद।

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में भले ही भिंड प्रदेश के सबसे गंदे शहर के रूप में चिह्नित हुआ। लेकिन नगरपालिका ने इस सर्वेक्षण को लेकर थोड़ी भी गंभीरता अपनाई होती तो भिंड नगरपालिका देश के टॉप 100 शहरों में शामिल हो सकती थी। एफएसटी प्लांट (मड टैंक खाली करने के लिए), कंपोस्ट पिट (अपशिष्ट पदार्थ से जैविक खाद बनाना) और एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी) जैसे प्लांट यदि नगरपालिका ने समय रहते लगा लिए होते तो उसे 500 से ज्यादा अंकों का फायदा होता।

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में भिंड नगरपालिका को 6 हजार अंकों में से 2612.87 अंक प्राप्त हुए हैं, जिससे भिंड को एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले 372 शहरों में 183वीं रैंक प्राप्त हुई है। वहीं इस आबादी की मध्यप्रदेश के 28 शहरों में भिंड सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। जबकि बीते साल इसी कैटेगरी में भिंड ने 2998 अंक प्राप्त किए थे। लेकिन इस साल नगरपालिका ने तो शहर में साफ सफाई पर ज्यादा ध्यान दिया और न ही तकनीकी रूप से अंक बढ़ाने के लिए कोई प्रयास किए।

परिणामस्वरुप इस बार के सर्वेक्षण में भिंड को बीते साल से 386 अंक कम प्राप्त हुए। जबकि नगरपालिका तकनीकी स्तर पर यदि प्रयास करती तो उसे 500 से ज्यादा अंको का फायदा होता और वह एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में टॉप- 100 में शामिल हो सकती थी।

पिछले साल किस सेक्टर में कितने मिले अंक और इस वर्ष क्या रही स्थिति

सर्टीफिकेशन
पिछले साल इस सेक्टर में 1500 में से 300 अंक प्राप्त हुए थे, जिसमें ओडीएफ प्लस का लाभ मिला था। इस वर्ष भी नपा इस सेक्टर 1800 में से 300 अंक प्राप्त हुए। जबकि नपा इस साल यदि ओडीएफ डबल प्लस कर लेती तो अंक ओर बढ़ सकते थे।

सेवास्तर प्रगति
बीते वर्ष सेवास्तर प्रगति में भिंड नगरपालिका को 1500 में से 384 अंक मिले। जबकि इस साल इस सेक्टर में भिंड नगरपालिका को 2400 में से 1387.97 अंक मिले हैं। इस वर्ष नपा ने इस सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन किया,जिस वजह से अच्छे अंक आए।

नागरिक प्रतिक्रिया

स्वच्छता सर्वेक्षण नागरिक प्रतिक्रिया का भी अहम रोल है। पिछले वर्ष यह सेक्टर 1500 अंकों था। जबकि इस साल यह सेक्टर 1800 अंकों का हो गया। बीते साल भिंड नगरपालिका ने इस सेक्टर में 924 अंक प्राप्त किए। वहीं इस वर्ष भी 924 अंक ही मिले।

चार साल पहले खरीदी कंपोस्ट मशीन ताले में बंद इसलिए कट गए जरूरी अंक
भिंड नगरपालिका ने वर्ष 2017 में 9 लाख रुपए की लागत से अपशिष्ट पदार्थों से जैविक खाद बनाने के लिए कंपोस्ट मशीन खरीदी थी, जिसे शहर की सब्जी मंडी के पास नसिया मंदिर के पास लगाया गया था। लेकिन पिछले चार साल से यह मशीन बंद पड़ी हुई है। जबकि यह मशीन चालू होती तो नगरपालिका कुछ अंकों का फायदा हो सकता था। हालांकि नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि जब यह मशीन खरीदी थी, तब शहर में हर रोज 18 से 20 टन अपशिष्ट कचरा निकलता था। वहीं वर्तमान में इसकी मात्रा बढ़कर 50 टन तक पहुंच गई है।

ऐसे में इन मशीनों की संख्या ओर बढ़ाए जाने अथवा कंपोस्ट पिट बनाए जाने की आवश्यकता है। खास बात तो यह है कि गोरमी और लहार जैसी छोटी नगरपंचायतों ने कंपोस्ट पिट बनाकर स्वच्छता सर्वेक्षण में अपने अंक बढ़ा लिए। लेकिन भिंड नगरपालिका ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।

टॉप-100 में आने के लिए चाहिए थे 3280 अंक
इस साल के सर्वेक्षण में भिंड नगरपालिका को 2612.87 अंक मिले हैं। जबकि भिंड नगरपालिका ने मड टैंक खाली करने के लिए एफएसटी प्लांट बनाया होता तो उसे सीधे 300 अंकों का फायदा होता। इसी प्रकार से कंपोस्ट पिट होने पर 200 और मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी की व्यवस्था करने पर भी 200 अंक मिलते। यानि नगरपालिका के स्कोर बोर्ड में सीधे 700 अंक बढ़कर 3312 अंक होते। वहीं इस बार टॉप-100 में शामिल अंतिम शहर पंजाब के मोगा के 3278 अंक आए हैं। वहीं मध्यप्रदेश में भिंड शहर शिवपुरी के स्थान पर होता।

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