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  • Mustard Seeds Were Not Sold On The Support Price, There Was A Rush To Sell In The Market Because The Price Of Support Here Was Rs 900 More Than The Quintal.

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किस काम का समर्थन मूल्य:समर्थन मूल्य पर सरसों का दाना भी नहीं बिका, मंडी में बेचने के लिए लगी भीड़ क्योंकि यहां समर्थन के भाव से 900 रु क्विंटल ज्यादा

भिंड12 दिन पहले
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  • केंद्रों पर जो बैनर लगाए वह भी उड़ गए, किसान नहीं आते इसलिए कर्मचारियों ने भी आना किया बंद

सोमवार की दोपहर 2 बजे हैं। शहर की कृषि उपज मंडी परिसर में यूटीलिटी शेड प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था उदोतपुरा को दिया गया है ताकि वह यहां समर्थन मूल्य पर गेहूं, सरसों, चना और मसूर की खरीद करें। लेकिन यहां न तो कोई किसान है और न ही कोई समिति का कर्मचारी। 8 दिन पहले (27 मार्च) यहां लगाया गया खरीद केंद्र का बैनर भी अब उड़ चुका है। कुछ यही हालत मंडी परिसर में बने दूसरे खरीद केंद्र की है।

कैंटीन के बगल से स्थित टीनशेड प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था बबेड़ी को दिया गया है। लेकिन यहां भी कोई नहीं है। जबकि इसके उलट मंडी परिसर के वे टीनशेड जहां व्यापारी अनाज की बोली लगा रहे हैं, वहां किसानों की भीड़ जमा है। उपज से भरी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्राॅलियां खड़ी हुई है। तपती धूप में किसान अपनी उपज की बोली लगने का इंतजार कर रहे हैं।
बबेडी से ट्रैक्टर ट्राॅली में सरसों भरकर लाए किसान रामाधार सिंह से पूछा कि क्या आपने ने समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया। उन्होंने सीधा जवाब दिया हां। फिर पूछा तो सरकारी केंद्र पर उपज बेचने क्यों नहीं जा रहे। यहां धूप में क्यों इंतजार कर रहे हो। वे बोले जब भाव व्यापारी अच्छा दे रहा है, पैसा भी तत्काल मिल रहा है तो कोई क्यों सरकारी केंद्र पर जाएगा। दूसरा केंद्र पर फसल बेचने के लिए 100 झंझटों का सामना करो।
सरकारी खरीद से किसानों का मोहभंग, इसलिए पसरा खरीद केंद्रों पर सन्नाटा
यहां बता दें कि जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के 28 हजार 294 किसानों ने पंजीयन कराया है। इसी प्रकार से सरसों के लिए भी 23 हजार 609 किसानों ने पंजीयन कराया है। लेकिन पिछले 8 दिन (4 कार्य दिवस शेष दिन अवकाश रहा) में इन केंद्रों पर बौनी (खरीदी प्रारंभ) तक नहीं हुई है।

इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि जिले में गेहूं की प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में देरी से होती है। इसलिए किसान होली के बाद गेहूं की कटाई की तैयारी शुरु करते हैं। जबकि सरसों का भाव मंडी में 5500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। जो कि समर्थन मूल्य से 900 रुपए ज्यादा है। ऐसे में किसानों का सरकारी खरीद केंद्रों से मोहभंग हो गया है।
जिला मुख्यालय ही नहीं ग्रामीण अंचल में भी सन्नाटा, कर्मचारियों ने भी आना छोड़ा
समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए सरकार ने 58 केंद्र बनाए हैं। जबकि सरसों के लिए 34 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें से 4 केंद्र जिला मुख्यालय पर स्थित हैं। जबकि शेष ग्रामीण अंचल में है। लेकिन किसी भी केंद्र पर किसान जाने का मन नहीं रहे हैं।

सभी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। जबकि प्रतिदिन सभी केंद्रों से 10-10 किसानों को मैसेज भेजे जा रहे हैं, जिसमें 3 बड़े कास्तकार और 7 छोटे कास्तकार शामिल है। वहीं किसानों के न आने की वजह से समिति कर्मचारियों ने भी केंद्र पर आना छोड़ दिया है। उनका कहना है कि जब खरीद केंद्र पर किसान ही नहीं आ रहे तो हम आकर क्या करेंगे।

उपज लाने मैसेज भेज रहे फिर भी केंद्रों पर नहीं आ रहे किसान

  • हमारी तैयारियां पूरी है। सभी केंद्रों से प्रतिदिन किसानों को तुलाई के लिए उपज लाने हेतु मैसेज भी भेजे जा रहे हैं। लेकिन किसान नहीं आ रहे हैं। हालांकि सरसों का भाव मंडी में ज्यादा है। लेकिन गेहूं की अभी कटाई चल रही है। इसलिए कुछ समय बाद गेहूं आना शुरू होगा। - भजनलाल, प्रभारी प्रबंधक जिला विपणन संघ, भिंड

सोमवार को 4 हजार क्विंटल से ज्यादा सरसों मंडी में आई

  • होली के बाद आज मंडी खुली है। आज भी करीब 4 हजार क्विंटल से ज्यादा सरसों मंडी में आई थी। सरसों तो पिछले 20 दिनों से मंडी में आ रही है। इस बार किसानों को भाव भी अच्छा मिल रहा है। इसलिए मंडी में बड़ी संख्या में किसान उपज बेचने आ रहे हैं। - लोकेंद्र सिंह तोमर, सचिव, कृषि उपज मंडी भिंड

पहली बार बाहर के व्यापारी भिंड आए तो बढ़ा सरसों का भाव

जानकारों की मानें तो पहली बार समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव में व्यापारी किसानों की सरसों खरीद रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि इस बार बाहर के व्यापारी भिंड की सरसों खरीदने के लिए आए हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण किसानों को फायदा हो रहा है। प्रतिदिन से 3 से 4 हजार क्विंटल सरसों भिंड मंडी से दूसरे शहरों के लिए जा रही है।

  • 28294 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है।
  • 23609 किसानों ने समर्थन मूल्य पर सरसों बेचने के लिए पंजीयन कराया है।
  • 5500 रुपए प्रति क्विंटल सरसों का भाव चल रहा है, जो समर्थन मूल्य से 900 रुपए ज्यादा है।
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