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बाढ़ का कहर:चंबल और सिंध में पानी घटा, पर खतरे के निशान से ऊपर, क्वारी नदी चढ़ने से तीन गांवों के रास्ते बंद

भिंड2 महीने पहले
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देवालय गांव में पानी भरने के बाद सुरक्षित स्थान पर जाते ग्रामीण। गांव की महिलाओं को उनके मायके भेज दिया गया है। - Dainik Bhaskar
देवालय गांव में पानी भरने के बाद सुरक्षित स्थान पर जाते ग्रामीण। गांव की महिलाओं को उनके मायके भेज दिया गया है।
  • चंबल नदी खतरे के निशान से 4 मीटर और सिंध खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर, अब क्वारी से भी खतरा

चंबल और सिंध नदी में उफान कम होना शुरू हो गया है लेकिन अब क्वारी नदी राैद्र रूप में आ रही है। क्वारी में लगातार पानी बढ़ने से तीन गांव का रास्ता बंद हो गया है। उधर चंबल और सिंध नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने से कई गांव अभी भी टापू बने हुए हैं। इन गांवों में रहने वाले लोग अपने बलबूते पर जिंदा हैं। चारों ओर पानी से घिरे होने के कारण बिजली सप्लाई पहले से ही बंद है। ऐसे में ग्रामीण और परेशान हैं।पिछले चार दिन में चंबल नदी 2.5 मीटर घटकर 126 मीटर पर आ गई है। हालांकि चंबल खतरे के निशान से अभी भी 4 मीटर ऊपर है।

चंबल का खतरे का निशान 122 मीटर पर है। वहीं सिंध का जलस्तर 19.20 मीटर से उतरकर 11.40 मीटर पर पहुंच गई है जो कि खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर है। हालांकि दोनों ही नदियों में धीरे-धीरे काफी हद तक जलस्तर नीचे आने के बाद बाढ़ ग्रस्त गांवों में पानी भी उतरने लगा है। बावजूद अभी कई गांव में टापू बने हुए हैं। वहीं शनिवार को देर रात चंबल में फिर से पानी बढ़ने लगा है। 2270 परिवारों को अनाज देने की तैयारी: भिंड और अटेर विकासखंड में बाढ़ प्रभावित 2270 परिवारों को प्रशासन ने अनाज देने के लिए चिह्नित किया है। सरकार ने बाढ़ पीडित परिवारों को 50 किलो अनाज देने की घोषणा की है। साथ ही उन्हें गृहस्थी का सामान ठीक कराने के लिए 5 हजार रुपए देने की भी बात कही है।

ऐसे में भिंड ब्लॉक में 1385 और अटेर ब्लॉक में 885 परिवार को चिह्नित किया है। एसडीएम उदय सिंह सिकरवार ने बताया कि उन्होंने अटेर में फसल नुकसान के मुआवजे के लिए करीब एक करोड़ रुपए का मांग भी शासन को भेजी है। इसके अलावा बाढ़ पीडितों को 5-5 किलो आलू देने की भी तैयारी की जा रही है।

वृद्धा का दर्द: जा बाढ़ में चकिया, चूल्हाे, भूसा सब बह गओ, अब खावे काेऊ कछु नहीं है...
चंबल नदी किनारे स्थित देवालय गांव में बाढ़ से ग्रामीण भयभीत है। पिछले पांच दिन से गांव टापू बना होने से अब महिलाएं अपने बच्चों को लेकर मायके जा रही हैं जबकि पुरुष घर रखाने के लिए मजबूरीवश रुके हुए हैं। एनडीआरएफ की टीम बाेट से इन महिलाओं को गांव से बाहर निकालकर अटेर छोड़ रही है।

गांव की 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला शांति देवी कहती हैं कि दो साल पहले भी बाढ़ आई थी तब स्थिति बहुत बदतर हो गई थी। इस बार भी वैसे ही हालत बन रहे हैं। शांतिदेवी ने कहा- जा बाढ़ में चकिया, चूल्हो, भूसा सब बह गओ। घर की एक पदा (दीवार) भी गिर गई। अब का खुद खावे और पोएन (जानवरों) को खवावे काे कछु नहीं है। वहीं गांव के एक बुजुर्ग कहते हैं कि कल से बहुएं बिटिया निकारवो शुरू कर दओ है। पानी बढ़ाे तो का करेंगे।
जो राशन था वह भी खत्म, अब तो दो वक्त के रोटी के पड़े लाले, कोई देखने तक नहीं आया
अटेर जनपद का ग्राम नावली वृंदावन। चंबल के उफान लेते ही यह गांव सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आता है। इस बार भी पिछले पांच दिन से इस गांव करीब 250 महिला, पुरुष और बच्चे गांव में कैद है। गांव से 25 मीटर की दूरी पर पानी ही पानी है। इसलिए उनका अटेर से पूरी तरह से संपर्क कटा हुआ है। गांव के पप्पू पुरवंशी और कल्लू पुरवंशी बताते हैं कि खाने पीने का उनके पास जो सामान था, वह पिछले पांच दिन में खत्म हो चुका है।

अब तक दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं। पांच दिन से बिजली कट होने की वजह से मोबाइल फोन भी डिस्चार्ज हो गए हैं, जिससे अब वे फोन पर भी किसी से मदद भी नहीं मांग पा रहे हैं। प्रशासन को कोई अधिकारी अब तक उनका हाल जानने तक के लिए नहीं आया है कि वे जिंदा भी हैं या नहीं।

नदी उतरी तो शुरू की पुलों की मरम्मत

सिंध नदी के शांत होने के प्रशासन ने पुलों की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। शनिवार को भिंड-लहार रोड पर मेहदा पुल की प्रशासन ने एप्रोच रोड दुरुस्त कराई। इसी प्रकार से लहार अमायन रोड पर स्थित पर्रायंच पुल की एप्रोच रोड को दुरुस्त किया गया है।

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