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  • With Nano Urea, The Problem Of Fertilizers Will Be Removed In Front Of The Farmers, By Spraying Like Medicine, You Will Be Able To Increase The Yield, IFFCO Patents On The International Label

नैनो यूरिया लाए हैं, ड्रोन से होगा छिड़काव:इफको डायरेक्टर बोले- अफसर कुर्सी पर बैठकर डिमांड के आंकड़ें न दें, जमीनी सर्वे करें

पवन दीक्षित/ भिंड3 महीने पहले

ग्वालियर और चंबल संभाग में यूरिया, DAP खाद की किल्लत बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री के गृह जिले तक में लूटने की और किसानों पर लाठियां बरसाने की घटनाएं भी सामने आईं। किसानों को खाद नहीं मिल रही। इसकी वजह क्या है? कौन जिम्मेदार है खाद की कमी के लिए, नैनो खाद कब तक आ जाएगी? खाद महंगी क्यों हो रही है? इस पर इफको के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर अमित प्रताप सिंह से दैनिक भास्कर ने बातचीत की।

देश में उर्वरक उत्पादन में नई किस्म या कोई परिवर्तन होने जा रहा है?

  • इफको उर्वरक उत्पादन में नया परिवर्तन करने जा रहा है। यह रासायनिक खादों के उत्पादन में नया इतिहास बनेगा। इफको ने नैनो यूरिया बनाया है। 500 ML नैनो यूरिया की किट की क्षमता 50 किलोग्राम यूरिया खाद जितनी है। इसे किसान आसानी से एक जगह से दूसरी जगह तक ले जा सकेगा। उन्नतशील किसान ड्रोन से नैनो यूरिया को कीटनाशक दवाओं की तरह छिड़काव करा सकेगा। इससे मेहनत की बचत होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।

नैनो यूरिया तर्ज पर खाद दूसरे देशों में उपयोग हो रही है?

  • इस तरह का प्रयोग भारत में ही हुआ है। इफको ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका पेटेंट कराया है। यह बहुत बड़ा मार्केट बनने जा रहा है। इसकी फ्रेंचाइजी विदेशों में भी दी जा सकेंगी।

हर साल खाद की जितनी मांग होती है, उतना किसानों को नहीं मिल पाता है। इसके पीछे कारण क्या है?

  • दरअसल, यह सरकारों का फेल मैनेजमेंट है। अफसरों से सरकार डिमांड पूछती है। अफसर दफ्तरों में बैठकर झूठे आंकड़े देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और होती है। सरकार भी मांग के अनुरूप खाद को नहीं खरीदती। मांग से कम हमेशा खाद सरकार द्वारा खरीदी जाती है, इसलिए हर साल समस्या बनती है। इसके अलावा 70:30 के अनुपात से खाद दी जाती है। 70 फीसदी खाद सरकारी संस्थान को दी जाती है, जबकि 30 फीसदी निजी संस्थानों को।

फिर खाद संकट गहराने का मुख्य कारण क्या है?

  • खाद संकट गहराने का मुख्य कारण पहले से मांग का आकलन न करना है। जब कम खाद होती है तो किसान भी ज्यादा खरीदने लगते हैं। इधर, बिचौलिए भी मुनाफाखोरी के फेर में सक्रिय होते हैं, इसलिए यह समस्या बन रही है।

पिछले कुछ सालों में खाद महंगी हुई है। इसकी वजह क्या है?

  • खाद महंगी होने के कई कारण हैं। विदेश से आने वाला निर्माण सामग्री का महंगा होना। कोरोना काल भी खाद महंगा होने का कारण है। डीजल-पेट्रोल के दामों का असर भी खाद पर आया है। खाद प्रोसेसिंग में यूज होने वाला मटेरियल महंगा होने की वजह से खाद महंगी हुई है। केंद्र सरकार सब्सिडी बढ़ाए तो खाद के दामों में गिरावट आ सकेगी।

खाद की किल्लत से किसानों को कैसे बचाया जा सकता है?

  • किसानों की मांग के अनुरूप सरकारें खाद खरीदें। अफसर कुर्सी पर बैठकर डिमांड के आंकड़े देने के बजाय जमीनी स्तर पर सर्वे करें। मांग से ज्यादा यदि खाद खरीदी जाती है तो खाद की किल्लत समाप्त हो जाएगी।

वर्तमान में प्रदेश स्तर पर कितनी खाद की मांग है?

  • इफको से करीब 6 लाख मीट्रिक टन डीएपी की मांग बनी हुई। वहीं, 8 लाख मीट्रिक टन यूरिया की है। इफको किसानों के हित में काम करने वाली देश की सबसे अग्रणी संस्था है। जो कि सरकार से सब्सिडी न मिलने पर भी किसानों काे सस्ते दामों में खाद बेच रही है।

इस तरह से ऑर्गेनिक है नैनो यूरिया

नैनो खाद पर इफको द्वारा तीन साल से रिसर्च चल रही थी। ये रिसर्च देश में मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, राजस्थान समेत कई प्रांतों में की गई। सरकारी एजेंसी इफको के विशेषज्ञों ने लंबे रिसर्च के बाद नैनो को तैयार किया है। नैनो यूरिया को तैयार किए जाने में रासायनिक नाइट्रोजन की जगह पर जैविक नाइट्रोजन का उपयोग किया गया है। जिससे अनाज व फल सब्जियां आसानी से अच्छे उत्पाद के साथ उगाई जा सकती हैं। नैनो खाद का नाइट्रोजन की कमी वाले खेतों में फसलों पर छिड़काव किया जा सकेगा और अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।