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अटेर में परेशानी:दो माह से अस्पताल में एक्स-रे मशीन बंद, भिंड जाने को मजबूर मरीज

भिंड22 दिन पहले
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर के इस कमरे में दो महीने से बंद है एक्सरे मशीन । - Dainik Bhaskar
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर के इस कमरे में दो महीने से बंद है एक्सरे मशीन ।
  • रेडियोग्राफर की ड्यूटी जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में लगी होने से एक्स-रे मशीन बंद, यहा मरीज हो रहे परेशान

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर में पदस्थ रेडियोग्राफर मनोज नागर की ड्यूटी जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में लगाए जाने से अस्पताल की एक्स-रे मशीन पिछले दो महीने से कमरे में बंद है। ऐसी स्थिति में अस्पताल में अगर को फ्रेक्चर एक्सरे के लिए आता है तो मशीन बंद होने पर उसको एक्सरे कराने के लिए भिंड आना पड़ता है। जिसके चलते जहां मरीजों को आवागमन में परेशानी हो रही है, वहीं दूसरी ओर उनका आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1 अप्रैल को रेडियोग्राफर मनोज नागर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर से हटाकर जिला अस्पताल बुला लिया गया था। जहां उनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में लगा दी गई। इस संबंध में अटेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. जेएस राजपूत का कहना है किसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर में रेडियोग्राफर के न होने से एक्सरे मशीन बंद होने के बार में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। व्यवस्था में जल्द सुधार लाया जाएगा।

दो माह में नहीं हुए एक्सरे
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार रेडियोग्राफर मनोज नागर सप्ताह में तीन दिन अटेर और तीन दिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फूप में अपनी सेवाएं देते थे। लेकिन उनके जिला अस्पताल पहुंच जाने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अटेर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फूप में पिछले दो महीने से एक्सरे नहीं हुए हैं। ऐसी स्थिति में अटेर के मरीजों को एक्सरे के लिए 35 किमी दूर भिंड जिला अस्पताल आना पड़ रहा है। इस दौरान अगर कोई मरीज दोपहर 1 बजे तक एक्सरे के लिए जिला अस्पताल नहीं पहुंचता है तो उसको बाजार में एक्सरा करना पड़ता है।
1983 से नहीं स्थाई रेडियोग्राफरः अटेर कस्बे के स्थानीय लोगों का कहना है कि अटेर अस्पताल में रोजाना 10 से 12 मरीज एक्सरे के लिए आते हैं। वर्ष1983 में अस्पताल में एक्सरे मशीन लगाई गई थी। लेकिन पिछले 38 साल से अस्पताल में स्थाई रेडियोग्राफर नहीं है। यहां पर हर तीन से चार साल में किसी अन्य अस्पताल के रेडियोग्राफर को अटैच कर दिया जाता है तो सप्ताह में दो या फिर तीन दिन एक्सरे करने के लिए आता है। अगर इस दौरान अटेर में किसी मरीज को एक्सरा कराना होता है तो उसे भिंड जाकर एक्सरा कराना पड़ता है, जिससे उसका समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।

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