ऑक्सीजन थी, पर सिस्टम ने दम घोंट दिया:सिलेंडर देने की प्रक्रिया पूरी करने में 1 घंटा लगा, स्टॉक के बावजूद ऑक्सीजन नहीं मिलने से 3 मरीजों ने दम तोड़ दिया

अशोकनगर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अस्पताल में मरीज की ईसीजी पीपीई किट पहनकर करती स्टाफ नर्स। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में मरीज की ईसीजी पीपीई किट पहनकर करती स्टाफ नर्स।
  • परिजनों का आरोप, डॉक्टर की पर्ची के बाद भी सिविल सर्जन ने काफी देर तक नहीं दिलाया सिलेंडर

अस्पताल में ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बुधवार को 3 मरीजों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाने के कारण उनकी मौत होने का हृदयविदारक मामला सामने आया है। सिलेंडर के लिए अस्पताल प्रबंधन ने प्रक्रिया इतनी लेट कर दी कि अटेंडर 1 घंटे तक परेशान होते रहे। बाद में दौड़ते हुए सिलेंडर लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक मरीजों ने दम तोड़ दिया।

तीनों ही घटनाक्रम ने बुधवार को जिला अस्पताल के पूरे मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर दिए। मृतक के परिजनों ने खुलकर कहा कि बगैर अप्रोच के जिला अस्पताल में सिलेंडर मिलना मुश्किल है। यहां तक की इलाज कर रहे डॉक्टर की पर्ची देने के बाद भी 1 से 2 घंटे तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाए।

स्थिति यह है कि मरीज के अटेंडरों की पीड़ा सुनने के लिए ही अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलते। अस्पताल में हुई मौत के सिविल सर्जन ने कहा कि अटेंडर जो आरोप लगा रहे हैं वो बिल्कुल गलत हैं। प्रक्रिया में इतनी देर नहीं लगती। सिलेंडर भी हैं।

दो उदाहरणों से समझिए प्रबंधन की लापरवाही

1. मृतक संजय त्रिपाठी (50) निवासी कोलुआ रोड, अशोकनगर:

अटेंडर श्रीकांत त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार रात 3 बजे रेमडेसिविर इंजेक्शन लगने के बाद आज सुबह करीब 5 बजे अचानक तेजी से ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा। मौजूद नर्स ने ऑक्सीजन लाने की बात कही। ड्यूटी डॉक्टर अंकुर तारे ने भी इमरजेंसी में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए पर्ची लिखी। डॉक्टर की लिखी पर्ची लेकर सुबह करीब 8 बजे जब ऑक्सीजन प्रभारी अमित ठाकुर के पास पहुंचे तो उन्होंने सिविल सर्जन डॉक्टर जसराम त्रिवेदिया को फोन लगाकर मामले की जानकारी दी।

मोबाइल पर बात करने के बाद ऑक्सीजन प्रभारी ने ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने की बात कही। हम परेशान होते रहे, लेकिन सुबह 11 बजे तक सिलेंडर नहीं मिल पाया। इसको लेकर किसी परिचित ने राज्यमंत्री को फोन लगा दिया और राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह का फोन आने के बाद सिविल सर्जन डॉक्टर त्रिवेदीया ने सिलेंडर ले जाने की बात कही। उस कमरे में ऑक्सीजन से भरे हुए काफी सिलेंडर रखे थे। एक छोटा सिलेंडर उठाकर दौड़ते हुए वार्ड में पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो गई। यदि समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जाता तो यह हादसा नहीं होता।

2. मृतक किरण नामदेव (47) निवासी बोहरे कॉलोनी अशोकनगर:

मृतक के भांजे वह अटेंडर पवन नामदेव ने बताया कि बुधवार सुबह 9 बजे अचानक सांस लेने में परेशानी आने पर हम अस्पताल पहुंचे। इलाज से पहले कोरोना की एंटीजन जांच कराई जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन ऑक्सीजन लेवल घटते हुए 60 से 65 रह गया।

मौजूद डॉक्टर ने जल्द ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को कहा। सिलेंडर लेने के लिए हम ऑक्सीजन प्रभारी व सिविल सर्जन के चक्कर लगाते रहे। करीब 1 घंटे तक दोनों अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद सिलेंडर मिल पाया। दौड़ते हुए सिलेंडर लिए वार्ड में पहुंचे लेकिन तब तक काफी देर हो गई। ज्ञात रहे बुधवार को ऐसे ही समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण राजेश सोनी नामक व्यक्ति की भी मौत होने की जानकारी मिली है।

अटेंडरों के आरोप गलत हैं, मैंने कोई देरी नहीं की
आ रहे टेंडरों के इस तरह के आरोप बिलकुल गलत है। ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए अब वास्तविक स्थिति जानने के बाद ही सिलेंडर दिए जाते हैं। हमारी प्राथमिकता रहती है कि जिन्हें ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा जरूरत है उन्हें पहले सिलेंडर मिल जाए। वैसे इस प्रक्रिया में ज्यादा समय नहीं लगता।
- डॉ. जसराम त्रिवेदीया, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

खबरें और भी हैं...