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खराब रिजल्ट सुधारने की कवायद:10वीं की छमाही परीक्षा में 50 फीसदी बच्चे फेल, 10 बच्चे गोद लेंगे शिक्षक

अशोकनगर12 दिन पहले
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बैठक को संबोधित करते डीईओ और मौजूद स्कूल के प्राचार्य। - Dainik Bhaskar
बैठक को संबोधित करते डीईओ और मौजूद स्कूल के प्राचार्य।
  • अर्द्धवार्षिक परीक्षा में खराब परिणाम को लेकर डीईओ कार्यालय में हुई बैठक
  • डीईओ बोले- समस्या की खिड़की बंद करें, समाधान तलाशें

कोरोनाकाल में हुई अर्द्धवार्षिक परीक्षा के परिणामों ने शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी। कुल 99 शासकीय स्कूलों के परिणाम देखने पर 50 प्रतिशत यानी आधे बच्चे फेल निकले। खराब रिजल्ट को सुधारने शिक्षा विभाग ने अब नई कवायद शुरू करते हुए प्रत्येक शिक्षकों को 10-10 बच्चे गोद देने का प्लान बनाया है। साथ ही विषय विशेषज्ञों के नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे।

अर्द्धवार्षिक परीक्षा के खराब परिणाम को लेकर सोमवार को डीईओ कार्यालय में हुई बैठक में प्लान तैयार कर लिया है। एक प्राचार्य ने तो अपने स्कूल के शिक्षकाें के लिए 5 हजार रुपए इनाम का ईनाम देने की घोषणा कर दी। बच्चों के लिए भी पुरस्कार रखने की बात कही।

ज्ञात रहे 99 में से 50 स्कूल ऐसे है जिनका परिणाम 60 फीसदी से कम रहा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिले के 99 सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं ली। परीक्षा में 10वीं का परिणाम 50 प्रतिशत रहा। जबकि 12वीं का परिणाम 75 फीसदी तक रहा। जहां 12वीं में 3 स्कूल ऐसे रहे जिनका परिणाम 39, 49, 53 फीसदी रहा जबकि 10वीं में 50 स्कूल ऐसे रहे जिनका परिणाम 60 फीसदी से कम रहा।

शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करना चाहिए

डीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा सब लाेग समस्या बताएंगे तो समस्याओं के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। समस्याओं का कोेई अंत नहीं है। हमें समस्या की खिड़की बंद कर समाधान निकालना है जिससे बोर्ड परीक्षा परिणाम हमारा बेहतर रहे।

इसके लिए बच्चों को लिखने की आदत डालें। एपीसी महेश साहू ने कहा चुनौती बहुत बढ़ी है। अभी स्कूलों में 50 फीसदी बच्चे आ रहे हैं और इनसे ही हमें रिजल्ट लेना है। सभी प्राचार्य के पास सूची होना चाहिए कि उनके स्कूल में डी, ई ग्रेड में कितने बच्चे हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करना चाहिए।

टीचर कन्फ्यूज हैं: प्राचार्य

बहादुरपुर हाईस्कूल से आए प्राचार्य रविशंकर शर्मा ने कहा अभी तो टीचर कन्फ्यूज हैं। आप कह रहे हैं अच्छे परिणाम के लिए शिक्षकों के साथ रणनीति बनाएं। अभी हम ही आश्वस्त नहीं हैं तो हम बच्चाें को कैसे महत्वपूर्ण प्रश्न छांट दें, कौन से ब्लू प्रिंट से पढ़ा दें।

रिजल्ट सुधारने के लिए ये कवायद भी होगी

  • प्रत्येक शिक्षक को 10-10 बच्चे गोद देकर उनकी अपने स्तर से तैयारी कराने की जिम्मेदारी देंगे।
  • विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की सूचना बनाकर एक टीम बनाई जाएगी। जिनके नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे।
  • जहां टीचर नहीं वहां जिला स्तर से टीम बनाई जाएगी तो हर शनिवार काे स्कूलों में पढ़ाने जाएगी।
  • लिखने की आदत डालने के लिए बच्चों को होमवर्क देंगे।
  • अच्छा रिजल्ट देने वाले एवं कमजोर रिजल्ट वाले छात्रों की होगी सूची तैयार।
  • जहां अतिथि शिक्षकों की कमी उन स्कूलों की बनाई जा रही सूची।

गांव जाने अतिथि तैयार नहीं

आलम ये है कि 10 से 12 स्कूल ऐसे हैं जहां पढ़ाने के लिए कोई अतिथि शिक्षक तैयार नहीं है। कारण ग्रामीण क्षेत्र और दूरी ज्यादा होना है। जिस कारण फिजिक्स, गणित, संस्कृत और अंग्रेजी विषय के टीचर उपलब्ध नहीं हो पाएं हैं। इसी कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षा में रिजल्ट पर सीधा असर पड़ा है।

अब बेहतर परिणाम मिलेगा

कोरोना से स्कूलों में ठीक से पढ़ाई ही नहीं हो सकी। अब काफी हद तक सिलेबस को कवर कर लिया है। बावजूद अब शिक्षकों को बच्चे गोद देते हुए उनकी पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी। विशेषज्ञों के नंबर सार्वजनिक करेंगे। इससे अब बेहतर परिणाम मिलेगा। -आदित्य नारायण मिश्रा, डीईओ

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