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चंदेरी में बंदरों के आतंक का मामला:62 साल पहले भी ऐसे ही हालात बने थे, तब रेस्क्यू कर बंदरों को जंगल में छोड़ा था

अशोकनगर14 दिन पहले
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लोगों को काटकर घायल करने वाले बंदरों का ऐसा ही उत्पात शहर में 62 साल पहले 1958 में था। समस्या को निपटाने के लिए उस समय नगर पालिका ने रेस्क्यू करवाकर सभी बंदरों को पकड़वाकर दूर जंगलों में छोड़ा था। अब फिर वही समस्या खड़ी हो गई। स्थिति यह है कि अब बंदरों की संख्या पहले से भी ज्यादा हो गई। ऐसे में इनसे निपटना अब ज्यादा मुश्किल रहेगा।

ज्ञात रहे नगर पालिका द्वारा रेस्क्यू करने के बाद कई सालों तक लोगों को बंदरों के आतंक से छुटकारा मिल गया। लेकिन बाद में करीब 10 साल पहले से शहर में फिर 8-10 बंदरों का झुंड शहर में आ गया। शुरुआत में संख्या कम होने के कारण यह बंदर शांत रहे। बाद में तेजी से इनकी संख्या में बढ़ोतरी होने लगी।

4 साल पहले यह संख्या 300 के करीब पहुंच गई। इतनी संख्या हो जाने के बाद बंदरों ने शहर में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद साल 2018 के बाद बंदरों की यह संख्या 400 के करीब पहुंच गई। इतनी संख्या हो जाने के बाद लाल मुंह के ये बंदर आक्रामक होकर हमलावर बन गए। मकान की छतों पर लोगों को देखते ही बंदरों ने उन्हें काटते हुए जख्मी करने लगे। पिछले 1 साल से तो ऐसी स्थिति हो गई लोगों ने मकान की छत पर जाना ही बंद कर दिया।

बंदर के हमले से बचने में हाथ-पैर टूटे, 4 लाख में इलाज
करीब 2 साल पहले की बात है शहर के सौरभ सोनी मंदिर की छत पर थे। तभी बंदरों का एक झुंड वहां आ गया। सोनी को देखते ही बंदरों का झुंड उन पर टूट पड़ा। बचाओ में सौरव सोनी वहां से भागे और छत से नीचे गिर पड़े। इससे उनके हाथ और पैर में 5 से 6 जगह फैक्चर हो गया। लंबे समय तक इलाज लेने के बाद अब जाकर वह ठीक हुए हैं। लेकिन इलाज में चार लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो गए। एेसा घटनाक्रम नरेश क्षत्रिय के साथ हुआ। वे बंदरों से बचने के लिए छत से गिरे और इलाज में 2 लाख खर्च करना पड़े।

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