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गांव में कोरोना:नईसराय में 15 दिन में 8 की मौत, सेहराई में हर 10वें घर में सर्दी-खांसी के मरीज व शाढ़ौरा में अब टेस्टिंग ही बंद

अशोकनगर2 दिन पहले
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सेहराई में प्राइवेट क्लिनिक पर इलाज कराने के लिए लगी लोगों की भीड़। - Dainik Bhaskar
सेहराई में प्राइवेट क्लिनिक पर इलाज कराने के लिए लगी लोगों की भीड़।
  • जिले में दो इलाके ऐसे भी जहां लोगों ने जागरूकता से पाया संक्रमण पर काबू, बंगलाचौराहा और पिपरई कंट्रोल में

शासन प्रशासन की अनदेखी के कारण जिले में फिर संक्रमण का खतरा अब गांव में तेजी से फैल रहा है। लेकिन इसे छुपाने के लिए जिम्मेदारों ने ग्रामीण इलाकों में सैंपल न कर जांच करने का सिस्टम ही शुरू नहीं किया। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सैंपल लेने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग कोरोना की जांच कराने से पहले ही दम तोड़ने लगे हैं।

स्थिति जानने के लिए भास्कर ने जिले के 10 अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में पड़ताल की। इसमें यह बात सामने आएगी गांव के हर मोहल्ले में 10-12 घर छोड़कर सर्दी-खांसी व बुखार से पीड़ित मरीज हैं और वह स्थानीय झोलाछाप या अन्य डाक्टरों से ही इलाज करवा रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि यह मरीज अपनी जांच नहीं कराना चाहते। गांव से जुड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यहां सैंपल लेकर जांच करने की व्यवस्थाएं शुरू नहीं है। ऐसे में जांच कराने के लिए उन्हें 20 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस कारण ग्रामीण स्थानीय स्तर पर ही झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर है।

इस कारण 15 अप्रैल के बाद से ग्रामीण इलाकों में अचानक से मौत का आंकड़ा बढ़ने लगा। खासकर 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार के बाद दम तोड़ने लगे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों को भी कोरोना को लेकर संदेह है, लेकिन जांच नहीं हो पाने के कारण ग्रामीण भी फिलहाल खतरे से अनजान है।

शाढ़ौरा: 150 पॉजिटिव निकले, अब टेस्टिंग ही बंद
अप्रैल माह में नगर सहित क्षेत्र में तेजी से संक्रमण फैला। 15 दिनों में ही 150 से ज्यादा लोग पॉजिटिव हो गए। वहीं कस्बे सहित ग्रामीण इलाकों को मिलाकर 15 से 20 लोगों की संदिग्ध अवस्था में मौत हुई। ऐसे में अति संवेदनशील श्रेणी में शामिल होने के बाद शाढ़ौरा में अब टेस्टिंग ही बंद कर दी। पिछले 4 दिनों से अब तक एक भी व्यक्ति की यहां जांच नहीं हो सकी। इसके पीछे स्वास्थ्य अधिकारियों का तर्क किट उपलब्ध नहीं होना सामने आया है।

नईसराय: 5 दिन में 8 की मौत, लक्षण कोरोना जैसे
कोरोना की दूसरी लहर का असर ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। कस्बे सहित ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लोग सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित है। जो निजी क्लीनिकों पर इलाज करा रहे हैं। तहसील मुख्यालय में अप्रैल माह में ही 8 लोगों की मौत हुई है। पंचायत रिकार्ड के अनुसार कस्बे में इस वर्ष जनवरी माह में एक, फरवरी में एक और मार्च माह में तीन लोगों की मौत हुई थी। अप्रैल के 15 दिन में हुई 8 लोगों की मौत में सभी बुजुर्ग शामिल है और सभी की तबीयत खराब होने के बाद ही मौत हुई। लेकिन जांच नहीं हुई।

भास्कर में पढ़िए 7 गांवों के हाल... पहले अनदेखी, अब ग्रामीण इलाकों में सैंपलिंग ही नहीं, बिना जांच के दम तोड़ रहे ग्रामीण

सेहराई: हर 10वें घर में सर्दी-खांसी का मरीज, जांच किसी की नहीं
कस्बे में अप्रैल माह में 17 लोग पॉजिटिव हो चुके हैं। इनमें से 5 लोग ठीक होकर घर आ चुके हैं। वहीं 10 लोग होम क्वारेंटाइन होकर इलाज करा रहे हैं। एक व्यक्ति अशोकनगर में और एक व्यक्ति भोपाल में इलाज करा रहे हैं। कस्बे सहित ग्रामीण अंचल के अधिकतर घरों में सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज निकल रहे हैं। यह लोग प्राइवेट क्लिनिक पर आकर अपना इलाज करा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना की जांच भी नहीं होती है। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीज का प्राथमिक उपचार भी सही तरीके से नहीं हो पाता है। कस्बे का अस्पताल हाइवे पर स्थित है। इस अस्पताल से आसपास के 40 गांव जुड़े हैं।

महिदपुर: 10 की मौत, ऐसी तबीयत बिगड़ी कि सुधार नहीं हुआ, जांच नहीं हुई
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक क्षेत्र में फिलहाल एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं है। तीन हजार की आबादी वाले 23 गांव से जुड़े कस्बे में करीब 20 दिन पहले दो लोग पॉजिटिव आए थे, वह भी स्वस्थ हो गए। लेकिन यह कितना सही है यह तो क्षेत्र में सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों के सैंपल के जांच के बाद ही पता लग पाएगा। ऐसे मरीजों की संख्या सैकड़ों में है। पिछले 15 दिनों में गांव के 10 बुजुर्गों ने दम तोड़ दिया। इससे पहले एक साथ इतनी ज्यादा मौतें कभी नहीं हुई। हालांकि कोरोना की जांच नहीं हो पाने के कारण बुजुर्गों की मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका। लेकिन 2 बुजुर्गों की मौत ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण हुई।
अथाईखड़ा: हर मोहल्ले में संदिग्ध मरीज, झोलाछाप डॉक्टरों से ले रहे इलाज
अथाईखेड़ा में फिलहाल सर्दी खांसी व बुखार के डेढ़ सौ से ज्यादा मरीज है। हर मोहल्ले में बीमार पड़े यह लोग सैंपल लेकर कोरोना की जांच कराने को तैयार नहीं है। जांच नहीं कराने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्थानीय स्तर पर सैंपल लेकर जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। कोरोना कराने के लिए यहां से ग्रामीणों को 20 से 22 किलोमीटर दूर अशोकनगर या बहादुरपुर जाना पड़ता है। इतनी दूर जाने के बजाय लोग झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना ज्यादा उचित समझ रहे। समय रहते यदि प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो क्षेत्र में तेजी से संक्रमण बढ़ जाएगा। लेकिन प्रशासन इन गांव की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

यह दो इलाके ऐसे जहां संक्रमण पर पाया काबू

1. शहरों से कनेक्टिविटी का मुख्य केंद्र होने के बाद भी अब तक सुरक्षित

विदिशा अशोकनगर से लेकर भोपाल रायसेन के मुख्य मार्ग से जुड़ा होने के बाद भी बंगला चौराहा पर फिलहाल संक्रमण काबू में है। यहां के लोगों ने पूरी तरह से लाभ डाउन का पालन किया। यहां इलाज करने आ रहे अशोकनगर के डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनकी मौत हो जाने से ग्रामीण और सतर्क हो गए। यही वजह है कि ज्यादा कनेक्टिविटी होने के बाद फिलहाल यहां मरीज नहीं है।
2. क्षेत्र में 5 संक्रमित आते ही पुलिस ने दिखाई सख्ती, अब कंट्रोल

कुछ दिन पहले क्षेत्र में 5 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। क्षेत्र में संक्रमण की दस्तक होते ही पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। करीब 8-10 दिन पहले से ही पुलिस ने बेवजह घर से निकलने वालों को डंडे फटकारना शुरू किए। क्या हुआ कि 15 हजार की आबादी वाले नगर में लोग घरों से बाहर निकलना बंद हो गए और संक्रमण पर तत्काल काबू कर लिया गया। हालांकि अब नए पॉजिटिव नहीं आने के पीछे एक बड़ा कारण सैंपलिंग नहीं होना भी है। इसी बीच 4 दिन पहले गुरुवार को एक साथ हुई 5 लोगों की मौत से फिर क्षेत्र में संक्रमण का संदेह खड़ा हो गया है।

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