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पुनर्निर्माण:मंदिर शिखर के जीर्णोद्धार में मिलीं 84 जैन प्रतिमाएं

अशोकनगरएक महीने पहले
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  • 12वीं से 17वीं शताब्दी की बताई जा रहीं प्रतिमाएं, विधान में मास्क लगाकर पहुंचे जैन श्रद्धालु

श्री चौबीसी जैन मंदिर के शिखर के पुनर्निर्माण के दौरान 84 जैन प्रतिमाएं मिली हैं। ये प्रतिमाएं 12वीं से 17 वीं शताब्दी की बताई जा रही हैं। सभी 84 प्रतिमाओं का सिद्धचक्र महामंडल विधान के साथ पूजन, अभिषेक, शांतिधारा की गई। महामारी को देखते हुए दर्शन करने आए श्रद्धालु मास्क लगाए दिखे। मुनिश्री अभयसागरजी महाराज, मुनिश्री प्रभात सागरजी महाराज, मुनिश्री निरीह सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य नितिन भैया खुरई, राजेश भैया टड़ा एवं दीपक भैया तेहरका के निर्देशन में सुरेश कुमार राजीव कुमार चंदेरी हाटकापुरा परिवार ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान व विश्वशांति महायज्ञ के पुण्यार्जक बने। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन स्थानीय बालोद्यान में हुआ जिसका समापन विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में 24 समवशरण की रचना की गई थी। चंदेरी के अलावा ललितपुर, मुंगावली, सागर, खुरई, गंजबासौदा, बीना, राहतगढ़, खनियाधाना, बमौरी, अशोकनगर, सेहराई, ईसागढ़, गुना आदि जगह से श्रद्धालु पहुंचे।

सबसे बड़ी प्रतिमा भगवान पार्श्वनाथ की 9 इंच ऊंची
चौबीसी जैन मंदिर ट्रस्ट के सचिव अविनाश सर्राफ ने बताया कि अजितनाथ भगवान की वेदी का कार्य समाज करा रहा था। उसी दौरान जैन प्रतिमाएं मिली हैं। चार मूर्ति पत्थर की हैं। सबसे बड़ी पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा 9 इंच ऊंची है। दो भगवान आदिनाथ की हैं। इनमें चिन्ह प्रतीत नहीं हो रहा है। 7 मूर्ति तांबा व शेष पीतल की 1 इंच से 5 इंच ऊंचाई की हैं जिनका अभिषेक, शुद्धि, मार्जन कर मंदिर में विराजमान किया गया।

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