पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

प्रधानमंत्री आवास योजना:प्रशासन ने किए 3 करोड़ रु. खर्च फिर भी असली गरीबों को नहीं मिल सके आवास

अशोकनगरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • योजना में क्षेत्र के अपात्रों को लाभ देने के कारण वंचित हुए पात्र लोग
  • नतीजा : आज भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं लोग

प्रधानमंत्री आवास योजना में जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पात्र लोग अभी भी कच्चे मकानों में रह रहे हैं। वहीं अपात्र लोगों के पक्के मकान बन गए हैं। योजना के तहत प्रशासन ने 3 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च कर दी है। इसके बाद भी असली गरीबों को अभी तक आवास नहीं मिले हैं। यह लोग आज भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रह रहे हैं। कस्बे की आबादी करीब 5000 है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत सितंबर 2016 से अब तक 182 आवास बनाए जा चुके हैं। जबकि हाल ही के चरण में आवंटित हुए 23 आवास निर्माणाधीन है। चार किश्तों में आवंटित होने वाली एक लाख बीस हजार रुपए प्रति आवास की राशि के हिसाब से 2 करोड़ 46 लाख रुपए एवं मनरेगा के जरिए 32 लाख 28 हजार 750 रुपए और शोचालय प्रोत्साहन राशि को मिलाकर करीब 3 करोड़ की राशि सिर्फ कस्बे में खर्च की गई है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा पात्र व अपात्रों के बीच सही ढंग का चयन न होने से अब भी बड़ी संख्या में ऐसे गरीब हैं जो कच्चे मकानों में जिंदगी बड़ी मुश्किल से गुजार रहे हैं।

शिकायत पर कराएंगे जांच
2011 की सर्वे सूची के हिसाब से आवंटन हुआ है। यदि अपात्रों को लाभ मिला है, तो शिकायत मिलने पर उसकी जांच कराएंगे। जिन्हें आवास नहीं मिल सका है, उन्हें आवास प्लस की सूची का बजट आवंटित होने के बाद अवश्य मिल जाएगा।
जितेन्द्र जैन, सीईओ जनपद पंचायत मुंगावली

केस - 1: बारिश में समय व्यतीत करने रिश्तेदारी में चली जाती है वृद्धा, 5 सदस्यीय परिवार में मात्र 1 मकान
70 वर्षीय रतिबाई के पति रामसिंह वंशकार की मौत करीब 7 वर्ष पहले हो चुकी है। वह सरकारी योजनाओं की मुनादी पीटते थे। रतिबाई अपने एकमात्र पुत्र चिंटू के साथ मिट्टी के मकान में गुजारा कर रही हैं। चिंटू की तीन संतानें हैं। पांच सदस्यीय इस परिवार के पास एकमात्र कच्चा मकान है। जिस पर बरसात से बचने तिरपाल चढ़ा रखी है। मजबूरी का आलम यह है कि बरसात और सर्दी के मौसम में रतिबाई एक कमरे में बेटा-बहू के साथ नहीं सो पातीं सो रिश्तेदारों में समय व्यतीत करने चली जाती हैं।

केस-2: 40 साल से पांच संतानों व पत्नी के साथ कच्चे मकान में रह रहा है परिवार
पांच संतानों व पत्नी के साथ सात सदस्यीय परिवार का दिहाड़ी मजदूरी कर पेट पालने वाले प्रताप अहिरवार अपने पुश्तैनी कच्चे मकान में पिछले 40 साल से रह रहे हैं। मिट्टी की दीवारें जगह-जगह से फट गई हैं। पिछले वर्ष बरसात में कच्चा मकान ढह गया था। प्रताप के कच्चे घर के पास ही एक तीन मंजिला आलीशान मकान है, जिसके मालिक को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है। उनका कहना है कि सरकार की यह व्यवस्थाएं उनकी दयनीय स्थिति को मुंह चिढ़ाती हैं।

केस - 3: कई बार कागज जमा करने के बाद भी नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास
कस्बे की गलियों में साफ-सफाई कर आजीविका चलाने वाले बबलू बाल्मीकि के परिवार में लकवाग्रस्त विधवा मां, पत्नी व तीन बच्चे हैं। बबलू का परिवार बस्ती की बसाहट के साथ ही यहां रहता है। हर बरसात में कच्चे मकान की दीवारें जमींदोज हो जाती हैं। कई बार कागज जमा कराने के बाद भी आवास सूची में उसका नाम नहीं आया। उन्होंने बताया कि बाल्मीकि बस्ती में उसके भाई ओमप्रकाश के अलावा हरिओम, कमलेश, छुटकोबाई, विमलाबाई को भी आवास नहीं मिला है। इस बस्ती में अब तक कुल दो आवास आवंटित हुए हैं।

0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- धार्मिक संस्थाओं में सेवा संबंधी कार्यों में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। कहीं से मन मुताबिक पेमेंट आने से राहत महसूस होगी। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और कई प्रकार की गतिविधियों में आज व्यस्तता बनी...

और पढ़ें