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अनदेखी:2 साल बाद भी ब्लड बैंक में नहीं स्टाफ, न ही लगाए रक्तदान शिविर, 1 यूनिट भी ब्लड नहीं

अशोकनगरएक महीने पहले
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  • 31 जुलाई 2018 को मिला था ब्लड बैंक का लाइसेंस, पैथॉलॉजी विभाग के टेक्नीशियन से ले रहे काम
  • नियमित स्टाफ न होने से इमरजेंसी में मरीजों के अटेंडर को आती है दिक्कत

दो साल 6 दिन पहले जिला अस्पताल को ब्लडबैंक खोलने का लाइसेंस मिला। लेकिन अभी तक ब्लड बैंक पूरा साल भर में 2627 यूनिट ब्लड इमरजेंसी मरीजों को चढ़ाया लेकिन अभी तक इमरजेंसी सेवा में शामिल ब्लड बैंक 17 घंटे ऑन कॉल चलता है। यानी 2 साल बाद भी ब्लड बैंक के नाम पर अभी तक एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं हो सकी है। जबकि दो साल में शासन को कई बार ब्लड बैंक में स्थाई स्टॉफ पदस्थ करने की पत्रों द्वारा मांग की जा चुकी है। ब्लड बैंक की शुरूआत को 2 साल पूरा होने पर जब हमने पड़ताल की तो इमरजेंसी सेवा में शामिल ब्लड बैंक का संचालन 24 घंटे संचालन नहीं हो पा रहा है। ब्लड बैंक में रेग्युलर स्टॉफ की भर्ती नहीं हो सकी है जबकि यहां पर 4 टेक्नीशियनों की जरूरत है, जिसमें से 3 टेक्नीशियन को 8-8 घंटे की ड्यूटी लगाई जा सके जबकि एक टेक्नीशियन रिलीवर के रूप में सेवा दे सके। इस वजह से अस्पताल खुलने के समय सुबह 9 से शाम 4 बजे तक ब्लड बैंक में पैथोलॉजी के टेक्नीशियन उपलब्ध रहते हैं। वहीं इमरजेंसी के समय इन टेक्नीशियन को ही ऑन कॉल बुलाया जाता है। इसके अलावा स्टॉफ नर्स भी एक होने की वजह से सिर्फ पौथोलॉजी खुलने के समय तक ब्लड बैंक खुला रहता है।

रेग्युलर स्टाफ न होने से ये दो बड़ी परेशानियां लोगों के लिए मुसीबत
1.रेग्युलर स्टॉफ न होने की वजह से इमरजेंसी सेवा में शामिल ब्लड बैंक में ऑन कॉल स्टॉफ को बुलाना पड़ता है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों को उठाना पड़ती है जो टेक्नीशियन या स्टॉफ का नंबर घंटों तक खोजते रहते हैं।.
2.ब्लड बैंक के लिए जो टेक्नीशियन बताए जाते हैं वे पैथोलॉजी में भी काम करते हैं। ऐसे में स्टॉफ पर वर्क लोड अधिक हो जाता है। इसके अलावा ऑनकॉल बुलाने पर ब्लड में हीमोग्लोबिन सहित अन्य तत्वों की जांच करने के लिए अलग से टेस्ट लगाना पड़ते हैं, इससे अतिरिक्त ड्यूटी होने पर गड़बड़ी की आशंका भी बनी रहती है।

प्रभारी डॉक्टर भी नहीं फ्री
ब्लडबैंक के लिए शासन स्तर से ब्लड बैंक प्रभारी बनाकर डा. मानसी राठौर को भेजा था। लेकिन पीजी करने के लिए वे इस्तीफा देकर कुछ ही दिन पहले चली गईं। फिलहाल अब प्रभार पैथोलॉजी प्रभारी डा. मिलिंद भगत के पास है।
^शासन को हमारी तरफ से ब्लड बैंक में रेग्युलर स्टॉफ पदस्थ करने के लिए कई बार पत्र लिखे जा चुके है। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर रेग्युलर स्टॉफ पदस्थ कर काम करवाया जा रहा है।
डा. हिमांशु शर्मा, सिविल सर्जन अशोकनगर।

जानिए... कोरोना काल में ही 171 यूनिट ब्लड चढ़ा
अगर ब्लड के खपत के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ जुलाई माह में ही 171 युनिट ब्लड चढ़ चुका है। इसमें से 154 युनिट तो वापस एक्सचेंज की वजह से आ गया लेकिन कई लोग ऐसे हैं जिनके पास डोनर तक उपलब्ध नहीं रहे। ऐसे 17 लोगों से ब्लड वापस नहीं आ सका जिनको बैंक में स्टोर रखा ब्लड दिया गया। यही वजह है कि अब अगर किसी को ब्लड की जरूरत है तो उसको उसी ग्रुप के डोनर को ले जाना पड़ रहा है।
1.3 था हिमोग्लोबिन, डोनर न मिलते तो मौत थी तय
रक्तदान किसी का जीवन बचा सकता है इसका प्रमाण गुरुवार को देखने मिला। जिले में ब्लड डोनर ग्रुप संचालित करने वाले प्रियेश शर्मा ने बताया कि एक बच्चे का हिमोग्लोबिन मात्र 1.3 रह गया था। ओ पॉजिटिव ग्रुप की जरूरत थी। लेकिन ब्लड बैंक में एक भी युनिट ब्लड नहीं होने पर तत्काल रक्तदाता को बुलाकर रक्तदान कराया। उसी बालक के लिए फिर जरूरत पढ़ने पर शुक्रवार की शाम भी रक्तदाता को बुलाकर रक्तदान कराया गया। यानी अगर इमरजेंसी में कोई रक्तदाता नहीं मिलता तो बालक का बचना मुश्किल था।

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