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कोरोना संक्रमण:आंकड़े छुपाने वाले अफसर आंखों से पट्टी हटाकर देखें

अशोकनगर12 दिन पहले
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  • 12 घंटे में 15 शवों का हुआ अंतिम संस्कार, देर रात तक धधकी चिता

कोरोना संक्रमण के दौर में 15 अप्रैल से शुरू हुए मौत के तांडव ने मंगलवार को अब तक के सारे आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। शहर में पहली बार 12 घंटे में 15 लोगों के शव श्मशान पहुंचे। दिन में यहां अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई तो परिजन डेड बॉडी लिए रात को श्मशान पहुंचे और रात के समय चिता नहीं जलने की पुरानी मान्यताओं को भूलकर देर रात तक अंतिम संस्कार करते रहे। ॉ

अशोकनगर में यह पहला मौका था जब 1 दिन में इतनी ज्यादा लोगों की मौत हुई। हालांकि इनमें से कोरोना पॉजिटिव मरीज के रूप में सिर्फ एक ही डेड बॉडी अधिकृत रूप से लाई गई। बाकी 14 लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से बीमारी के चलते होना बताया गया।

इसी तरह कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या व मौत के आंकड़े कम करने के लिए पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य विभाग ने जांच करना ही कम कर दी। ऐसे में अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही मौतों की तरह ही अब शहर में भी बिना जांच किए ही लोगों की मौत होने लगी है। इससे श्मशान में अंतिम संस्कार करने के लिए भीड़ रहती है जो सुबह से शुरू होती है और देर रात तक लगी रहती है।

सुबह 8.30 बजे से शुरू हो गया शवों को लाने का सिलसिला
मंगलवार को सुबह 8.30 बजे से ही श्मशान में शवों को लाने का सिलसिला शुरू हो गया। जो देर रात करीब 11 बजे तक चला। स्थिति यह रही कि श्मशान में बने सात पुराने और 3 नए यानी कुल 10 स्टैंड में से एक भी खाली नहीं था। ऐसे में जहां भी अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग की स्थिति बन गई। दिन में इंतजार करने के बाद तीन से चार सवा को रात करीब 9 बजे श्मशान लाया गया।

अफसरों का जोर सिर्फ आंकड़े छुपाने में
अफसरों का ध्यान इन दिनों सिर्फ पॉजिटिव मरीजों व इससे हो रही मौत के आंकड़ों को छुपाने पर ही है। यही वजह है कि उन्होंने मरीजों की जांच करना ही बंद कर दी। ऐसे में कई लोगों की तबीयत खराब होने के बाद जांच होने से पहले ही मौत होने लगी है।

रात में चिता नहीं जलाने की मान्यता भी भूले
हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक दिन ढलने के बाद चिता को आग नहीं लगाते। लेकिन कोरोना के चलते लगातार हो रही मौत को देखते हुए परिजनों ने आप इस मान्यता को दरकिनार करते हुए रात में भी अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया। उन्हें चिंता रहती है कि यदि अंतिम संस्कार नहीं किया तो सुबह श्मशान में भीड़ बढ़ जाएगी।

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