आगजनी / किसान नरवाई में आग न लगाएं, इससे खाद बनाएं, जमीन की उर्वरक शक्ति भी बढ़ेगी

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  • किसान शासन के आदेश का उल्लंघन करते हुए नरवाई में आग लगा रहे हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

अशोकनगर. जिले में प्रशासन ने नरवाई में आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद भी किसान शासन के आदेश का उल्लंघन करते हुए नरवाई में आग लगा रहे हैं। इससे एक तरफ जहां जमीन की उर्वरक क्षमता कमजोर हो रही है। वहीं पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है।जिले में रबी फसल की कटाई हो चुकी है। 
कटाई के बाद किसान खेतों में खड़ी नरवाई को नष्ट करने के लिए उसमें आग लगा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की समझाइश और प्रशासन की चेतावनी के बाद भी नासमझी में किसान आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे इलाके में आगजनी की घटनाएं होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। क्षेत्र के मुंगावली, सेहराई, ईसागढ़, अशोकनगर, शाढ़ौरा, नईसराय, महिदपुर, पिपरई आदि क्षेत्रों में आए दिन नरवाई में आग लगाई जा रही है। नरवाई में आग लगाने के कारण कई बार किसानों की खेतों में खड़ी फसल भी जल जाती है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि किसान इन फसलों के अवशेष को इकट्ठा कर गोबर, ट्राइकोडरमा, फफूंदी और फास्फोरस घुलनशील जीवाणु और रोक फास्फेट में मिलाकर जमीन में फैला दें तो इससे खाद बन जाएगी।
फसल की बढ़ेगी उत्पादक क्षमता : फसल के अवशेष जलाना हानिकारक है। किसान फसल के अवशेष से खाद बनाकर खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकते हैं। जबकि आग लगाकर वे मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्मजीव को नष्ट कर देते हैं। एनजीटी के निर्देश पर नरवाई जलाने पर 15 हजार रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है।

पहले हो चुकी हंै घटनाएं फिर भी नहीं मान रहे 

नरवाई में आग लगाने से कुछ दिन पहले सेहराई क्षेत्र में आग ने गंभीर रूप ले लिया था। लोगों की सजगता और फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग को बुझाया था। वहीं नरवाई में आग लगाने से दो महिलाएं फंस गई थी। इनमें से एक महिला ने पेड पर चढ़कर अपनी जान बचाई थी। वहीं दूसरी महिला नरवाई की आग के कारण झुलस गई थी। इसी प्रकार जिले में कुछ दिन पहले करीब 100 साल पुराना बरगद का पेड़ जल गया था।

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