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त्योहार:नवरात्र में सौभाग्य, रवि सिद्धि योग सहित 4 मंगलकारी मुहूर्त

अशोकनगर8 महीने पहले
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  • सोने और चांदी, भवन भूखंड सहित अन्य वस्तुओं को खरीदने पर शुभ फल देने वाली होगी इस बार नवरात्र

दो दिन बाद नवरात्र शुरू हो रहें हैं। जिसके चलते झांकी समितियां अंतिम तैयारियों में लग गए हैं। इस बार घट स्थापना सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। इसके साथ ही नवरात्र के 9 दिन में से 7 दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि सिद्धि, द्विपुष्कर और सौभाग्य योग बनेंगे। पं. किशनलाल मिश्र के अनुसार यह योग लोगों को नई वस्तु खरीदने, गृह प्रवेश करने, रिश्ते तय करने के मामले में शुभ फल देने वाले होंगे। प्रमुख ग्रहों के मार्गी चलने से लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस बार 17 अक्टूबर को नवरात्रि घट स्थापना सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी।

गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य, वस्तुओं की खरीदारी सभी के लिए शुभ
सर्वार्थ सिद्धि योग :
17 अक्टूबर को घटस्थापना सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। 19, 23, 24 अक्टूबर को भी सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। इस योग में मनोकामना से जप भक्ति करते हैं तो पूर्ण फल मिलता है। इस योग में गृह प्रवेश, व्यापार मुहुर्त, मकान की नींव डालने, विवाह संबंध तय करने के लिए शुभ रहता है और पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
रवि सिद्धि योग : नवरात्र के दौरान यह योग 18 व 24 अक्टूबर को रहेंगे। इस योग में प्रशासन से संंबंधित कार्य, सोना खरीद-फरोख्त से संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है।
द्विपुष्कर योग : नवरात्र में 19 अक्टूबर को यह योग बनेगा। इस योग में खरीदारी करने पर दोबारा वह वस्तु खरीदने का योग मिलता है।

सौभाग्य योग : नवरात्र में 20 अक्टूबर को सौभाग्य योग बनेगा। इस दिन व्रत रखने से मनोकामना पूरी होती है। माता भगवती शीघ्र प्रसन्न होती हैं, इसलिए शुभ मुहूर्तों में आराधना करना विशेष फलदायी होता है। साधक को माता की आराधना अनन्य भाव से करनी चाहिए।

चार ग्रहों ने बदली चाल
उज्जैन के प्रसिद्धि पंडित श्रीरामचंद शास्त्री के अनुसार लंबे समय से ग्रहों की विपरीत गति और योग से कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है। इससे जीवन थम सा गया है। प्रमुख ग्रह भी मार्गी हो रहे हैं और इसकी वजह से जन-जीवन भी सामान्य होगा। राहू ग्रह 23 सितंबर को मिथुन राशि से अपनी उच्च वृष राशि में आ गया। केतु गृह धनु से अपनी उच्च वृश्चिक राशि मे आ गया है। गुरु गृह भी 12 सितंबर को वक्री चाल छोड़कर मार्गी चलने लगे। शनि ने भी अपनी वक्री चाल 29 सितंबर को छोड़ दी वह भी मार्गी चलने लगे।

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