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बृजेंद्र सिंह यादव V/S कन्हैयाराम लोधी..:सिंधिया के समर्थन में जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर सीएम शिवराज से भोपाल में भाजपा की सदस्यता लेने पहुंचे कन्हैयाराम को कांग्रेस ने मुंगावली से दिया टिकट

अशोकनगरएक महीने पहले
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  • 49 हजार यादव मतदाता के बाद दूसरे नंबर पर 23 हजार लोधी समाज के वोटर इसलिए मुंगावली से टिकट

विधानसभा चुनाव 2018 में साथ-साथ मिलकर प्रचार करने वाले दो नेता इस बार मुंगावली उपचुनाव में आमने-सामने होंगे। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में मार्च में कांग्रेस जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने वाले कन्हैयाराम लोधी को कांग्रेस ने अधिकारिक रूप से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं सिंधिया के समर्थन में श्री लोधी सीएम शिवराज सिंह से सदस्यता लेने भोपाल भी गए थे। लेकिन बाद में कांग्रेस में आने और यादव समाज के बाद लोधी मतदाता की संख्या होने से उनको कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया। भाजपा की ओर से राज्यमंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव पहले से ही तय प्रत्याशी हैं। कांग्रेस की तरफ से घोषित प्रत्याशी कन्हैयाराम लोधी कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहते हुए मुंगावली सीट से बृजेन्द्र सिंह चुनाव जीते थे। दो चुनाव में एक साथ प्रचार करने वाले अब आमने-सामने लड़ेंगे।

पहली बार दूसरे समाज के प्रत्याशी से होगी बृजेन्द्र यादव की टक्कर
कांग्रेस में कन्हैयाराम लोधी को जिलाध्यक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राज्यमंत्री श्री यादव की टक्कर पहली बार किसी दूसरे समाज के प्रत्याशी से होगी। मुंगावली उपचुनाव में राज्यमंत्री श्री यादव ने जिपं अध्यक्ष बाईसाहब यादव को पराजित किया था। वहीं वर्ष 2018 के चुनाव में सांसद डाॅ. केपी यादव को शिकस्त दी थी, लेकिन तीसरे चुनाव में उनका मुकाबला क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी जाति के घोषित प्रत्याशी से होगा।

लोधी को टिकट देने के पीछे जातिगत समीकरण
मुंगावली विधानसभा क्षेत्र यादव बहुल है। यहां 45 हजार से अधिक यादव मतदाता हैं तो दूसरे नंबर पर लोधी समाज आता है जिसके 23 हजार मतदाता है। पिछले दो चुनाव में बृजेन्द्र सिंह यादव की जीत का अंतर 2 से 2.5 हजार मतों का था। इस चुनाव में जातिगत समीकरणों के अलावा पूर्व में कांग्रेसियों द्वारा भाजपा से आने वाले लोगों को टिकट न देने का प्रस्ताव भी डाला था। ऐसे में पार्टी के बचे हुए कार्यकर्ता नाराज न हों, ये भी एक वजह कन्हैयाराम को प्रत्याशी बनाने की रही।

इन दावेदारों को पीछे छोड़ा
कन्हैयाराम लोधी ने सिंधिया के भाजपा में जाते ही पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन बाद में चंदेरी विधायक गोपाल सिंह चौहान के साधने से वे फिर से कांग्रेस में आ गए। इनके अलावा चंदेरी विधायक गोपाल सिंह चौहान के पुत्र मनु राजा,जिपं अध्यक्ष बाईसाहब यादव, सांसद डाॅ. केपी यादव के भाई अजयपाल सिंह यादव, प्रद्युम्न सिंह दांगी के नाम दावेदारों में थे।

जानिए अपने प्रत्याशी को
बृजेन्द्र सिंह यादव भाजपा
राजनीतिक सफर: करीब 15 साल से सक्रिय राजनीति में, दो बार विधायक रहे, वर्तमान में पीएचई विभाग में राज्यमंत्री।
उपलब्धि: 3 साल में दो बार विधायक बने।
कन्हैयाराम लोधी कांग्रेस
राजनीतिक सफर: लोधी समाज के प्रभावी नेता, 2018 विस चुनाव में सक्रिय भूमिका में आए, बड़ा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं।
उपलब्धि: मई 2018 में पहली बार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने।

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