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किसान परेशान:बैंक ने 33 किसानों का प्रीमियम तो काटा लेकिन बीमा की राशि अभी तक नहीं मिली

अशोकनगर2 महीने पहले
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  • पिछले साल अतिवृष्टि से बर्बाद हुई फसलों की अभी तक नहीं मिला बीमा क्लेम की राशि

प्रीमियम कटने के बाद भी किसानों के खातों में बीमित फसल का क्लेम नहीं आया है। इस लापरवाही की जवाबदारी अब कोई लेने के लिए तैयार नहीं है। यह स्थिति जिले के सभी ब्लॉकों में बनी हुई है। जहां किसानों को बीमा राशि के लिए बैंकों के चक्कर काटना पड़ रहा है। बैंकों ने फसल का बीमा करवाने के बाद किसानाें के खाते से प्रीमियम राशि काटकर कंपनी को भुगतान कर दी। लेकिन बीमित फसल की पॉलिसी की राशि आज तक किसान के खाते में नहीं आया और न ही किसानाें काे पाॅलिसी नंबर की जानकारी दी गई। 34928 किसानों को 47.57 करोड़ रुपए बीमा राशि स्वीकृत हुई थी। इनमें से ही सैंकड़ों किसानों को प्रीमियम राशि जमा करने के बाद भी क्लेम नहीं मिला है। दिसंबर 2019 में बीमा कंपनी ने किसानों की फसलों को बीमित किया था। बैंक व संबंधित कंपनी की लापरवाही रही कि पोर्टल खुलने के बावजूद कई किसानों के नाम कंपनी के एग्रीकल्चर पोर्टल पर नहीं चढ़ाए। इसी कारण बीमित फसल की पॉलिसी किसान के खाते में दर्ज ही नहीं हुई। इधर किसानों का कहना है कि उनके केसीसी खाता कई साल से हैं। खातों में आधार सहित जमीन की जमाबंदी व फोटो आदि की जानकारी बैंक शाखा में है। वहीं प्रीमियम की राशि भी बैंकों द्वारा जमा की जाती है। खास बात यह है कि कुछ किसानों को बीमा की राशि कई दिन पहले मिल चुकी है। इसमें खास बात यह है कि एक तरफ किसानों के नाम पर राजनीति चरम पर है लेकिन पीड़ित किसानों की मदद के लिए आगे कोई नहीं आ रहा है। लेकिन प्रीमियम की राशि जमा करने के बाद भी किसानों के खातों में अब तक क्लेम नहीं पहुंचा है। समीक्षा बैठक में भी उठा था मामला: बुधवार को पीएचई राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की समीक्षा बैठक में भी उनके पार्टी के किसान नेताओं ने फसल बीमा की राशि किसानों के खातों में नहीं पहुंचने का उल्लेख किया था। इस दौरान राज्यमंत्री श्री यादव ने कृषि विभाग से इसकी वजह पूछी तो वहां मौजूद डीडीए भी इसका स्पष्टीकरण नहीं दे सके थे।

ये है स्थिति... ईसागढ़ एसबीआई में ही ऐसे 33 मामले
जिले में जिम्मेदारों की लापरवाही से सैकड़ों किसान ऐसे हैं जिनके खातों में क्लेम की राशि नहीं आई है। इनमें ईसागढ़ एसबीआई में ही 33 किसान है। किसानों का कहना है कि जब बैंक ने फसल बीमा की प्रीमियम काटा है तो उनको फसल बीमा क्यों नहीं मिला। कई किसान ऐसे हैं जिनके क्रेडिट कार्ड बैंक में है और उसी कार्ड के माध्यम से फसल बीमा की प्रीमियम जमा की गई है। इस दौरान कुछ किसानों ने न्यायालय की शरण लेने की बात भी कही है।

पोर्टल पर एंट्री नहीं हुई है
^अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनकी पोर्टल पर एंट्री नहीं हुई है। जब किसानों का प्रीमियम कटता है तो एग्रीकल्चर पोर्टल पर एंट्री होती है। जब एंट्री नहीं हुई है तो बीमा आएगा ही नहीं।
विनोद जोशी, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी
^सही वजह तो हमें पता नहीं है। 33 किसान ऐसे हैं जिनकी राशि नहीं आई है। जिसको भेजने की बात बीमा कंपनी बोल रही है। बैंक की लापरवाही नहीं है।
रमेश अर्मनानी, प्रबंधक, एसबीआई ईसागढ़

आप खुद जानिए, किसानों के मुंह से उनका दर्द

^हमारे खाते से प्रीमियम राशि बैंक ने काटी। लेकिन फसल बीमा की राशि हमारे खातों में आज तक नहीं मिली। जब हमने जानकारी ली तो बताया कि फिर से क्लेम कर रहे हैं। करीब 50 बीघा जमीन पर दोनों भाइयों का बैंक द्वारा समय पर प्रीमियम काटा गया था। अगर क्लेम नहीं मिला तो न्यायालय की शरण लेना पड़ेगी। हेमंत सिंह परमार, किसान ^मैंने एसबीआई से 25 बीघा की केसीसी बनवाई थी। केसीसी बनवाए हुए 15 साल से अधिक समय हो चुका है। हर साल प्रीमियम काटा गया। मुझे 2 मई से आश्वासन भी दिया जा रहा है कि आपका बीमा आएगा लेकिन आज तक कोई राशि फसल बीमा के नाम पर नहीं मिली। मैने एसबीआई से खाता भी खत्म कर दिया है। रामबाबू सिंह रघुवंशी, किसान ^मेरे एसबीआई में तीन खाते हैं जिस पर केसीसी बनवाया है। तीनों खातों से बीमा का प्रीमियम भी बैंक ने काटा लेकिन बीमा राशि नहीं मिली। जब बैंक से जानकारी मांगी तो फील्ड ऑफिसर ने बताया कि गोहरा गांव में बीमा राशि नहीं आई है। एेसे में हम परेशान हो रहे हैं, और हमें सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। संजीव सिंह लोधी, किसान

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