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  • The Woman, Who Was Going By Bike With Her Son, Fell While Leaving The Speed Breaker, 3 Youths Arrived For Help, Admitted To The District Hospital, Now Healthy

ब्रेकर दुर्घटनाओं का कारण:बेटे के साथ बाइक से जा रही महिला स्पीड ब्रेकर से निकलते समय गिरी, मदद के लिए पहुंचे 3 युवक, करवाया जिला अस्पताल में भर्ती, अब स्वस्थ

अशोकनगर10 दिन पहले
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  • बेडौल स्पीडब्रेकर से पहले भी हो चुके हैं हादसे, जिम्मेदारों का ठीक कराने पर नहीं ध्यान

दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों पर बनाए गए स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वैसे तो जिले की अधिकतर सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, लेकिन विदिशा रोड पर तारासदन स्कूल, सेंट थॉमस के अलावा पोल फैक्टरी को मुड़ने वाले रास्ते के पहले बनाए बेडौल स्पीड ब्रेकरों से दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं। बुधवार की सुबह इन स्पीड ब्रेकर की बदौलत गांव से आ रही एक बाइक पर सवार महिला उछलकर गिर गई। जिसके सिर में चोट आने पर गंभीर अवस्था में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक हरजीत दांगी अपनी मां शशिबाई पत्नी लक्ष्मण सिंह दांगी 42 साल और 2 बच्चों के साथ अपने गांव मूडरा से अशोकनगर आ रहा था। तभी सेंट थॉमस स्कूल से पहले बने स्पीड ब्रेकर से निकलते समय उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई। अचानक स्पीडब्रेकर पर बाइक की गति तेज होने से पीछे बैठी मां उछलकर गिर गई। सिर में गंभीर चोट लगने से महिला के सिर से खून निकलने लगा। इस बीच वहां से कई लोग निकलते रहे लेकिन मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा। तभी वहां कार से आ रहे कपिल रघुवंशी, स्माइल खान, शैलू जैन ने घायल को देखकर कार रोकी और महिला को अपनी कार में रखकर जिला अस्पताल भर्ती कराया।

ब्रेकर निर्माण में मापदंडों का नहीं पालन
विदिशा रोड पर स्कूल अधिक होने की वजह से कई स्थानों पर ब्रेकर बने हैं। जिनमें कई ब्रेकर मापदंडों के मुताबिक हैं तो कुछ ब्रेकर मनमर्जी से बना दिए हैं। त्रिदेव मंदिर तक तीन ब्रेकर बने हैं लेकिन तीनों की ऊंचाई इतनी है कि यहां माह में कई बार बाइक चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद लगातार टोल वसूल रही कंपनी की नींद नहीं टूटी है।

गाइडलाइन के मुताबिक ब्रेकर ऐसे हों
पीडब्लूडी के सेवानिवृत्त ईई केके शर्मा ने बताया कि इंडियन रोड की गाइडलाइन के मुताबिक किसी ब्रेकर की चौड़ाई 3.7 मीटर और ऊंचाई 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि इन ब्रेकरों का निर्माण करने से वाहन डैमेज नहीं होना चाहिए। इनसे गुजरते समय वाहन चालक या उसमें सवार लोगों को असुविधा या अन्य प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। हालाकि पवारगढ़ के पास इसी तरह के ब्रेकर बने हैं। लेकिन इन तीन ब्रेकरों के निर्माण में नियमों का ध्यान नहीं रखा गया है।

खुद जानिए, खतरनाक ब्रेकरों से नुकसान
1.वाहनों की लाइफ होती है कम- तकनीकी तौर पर बेडौल ब्रेकर बनाने से वाहनों की लाइफ कम होती है। महानगरों की तुलना में दुपहिया वाहनों में अधिक काम निकलता है। ऑटोमोबाइल मैकेनिक नजीर कुर्रेशी ने बताया कि ब्रेकर व गड्ढों से वाहन के पार्ट्स समय से पहले ढीले हो जाते हैं। इससे समय से पहले वाहन कंडम होने लगते हैं। वहीं सबसे अधिक काम शॉकअप में आता है।
2.रीढ़ की हड्डी और गर्दन पर असर- ब्रेकर स्मूथ न होने और बेडौल होने की वजह से रीढ़ की हड्डी और गर्दन पर इसका सबसे अधिक असर पढ़ता है। फिजियो थैरेपिस्ट डा. हरीश भार्गव ने बताया कि शहर में 30 फीसदी लोगों को इस तरह की समस्या है। ब्रेकर स्मूथ न होने पर कमर और हड्डी के बने डिस्क का तालमेल प्रभावित होने से कमर और गर्दन दर्द की समस्या बनती हैं।

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