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कोरोना संक्रमण:पिछले साल अक्टूबर तक हुई थीं शहर में 456 मौतें, इस साल 412

अशोकनगर2 महीने पहले
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  • नवंबर में अब तक हुईं 43 मौतें, इनमें से बीमारी से मात्र 13, इनमें भी आकस्मिक मौतें शामिल

मार्च से शुरू हुए कोरोना संक्रमण के काल में मौतों के आंकड़े चौकाने वाले सामने आए हैं। जहां पिछले साल अक्टूबर तक शहर के नपा रिकार्ड में कुल 456 मौतें दर्ज हैं। जबकि इस साल ये आंकड़े बढ़त में न होकर पिछले साल से कम हैं। इस बार अक्टूबर तक शहर में सिर्फ 412 लोगों की मौत हुई है। इनमें भी महिलाओं की संख्या पिछले साल से कम है। कोविड-19 संक्रमण के दौर में लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सचेत हो गए हैं। इसका ताजा उदाहरण नगर पालिका परिषद के मृत सूचना रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े बता रहे हैं। अगर हम अक्टूबर माह तक के मृतकों के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ मई माह में पिछले साल से दो मौतें अधिक हुई। जबकि अन्य 9 माह में मौतों का आंकड़ा पिछले साल से कम है। इस साल में वैसे तो सभी माह में मृतकों की संख्या में कोई बड़ा फर्क नहीं है लेकिन पिछले साल सितम्बर और अक्टूबर माह में इस वर्ष की तुलना में क्रमश:22 और 29 मौतें अधिक हुई थी। जबकि इस वर्ष कोरोना संक्रमण के दौरान सबसे अधिक संक्रमण के मामले नवंबर माह को छोड़कर सितंबर माह में निकले थे। ऐसे में ये आंकड़े जहां कोरोना संक्रमण काल में लोगों के स्वास्थ्य के प्रति बदले रवैए को बता रहे हैं तो दूसरी तरफ यह भी बता रहे हैं कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं बल्कि जागरुक होने की जरूरत है।

क्या कहते हैं हमारे शहर के वरिष्ठ चिकित्सक
डॉ. डीके जैन ने बताया कि इस संक्रमण काल में लोगों में जागरूकता बढ़ी है। लोगों की मामूली तबीयत बिगड़ने पर वे तत्काल इलाज ले रहे हैं। जल्दी इलाज मिलने से हार्ट अटैक जैसी समस्या कम हुई। वहीं दूसरी वजह लोगों का मूवमेंट कम होना है। गर्मी में लॉकडाउन में लू से बचाव हुआ तो अधिकांश लोग इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उपाय कर रहे हैं। ये वजह है जिससे मृत्यु के आंकड़ों में कमी आई है। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि लोग लापरवाही बरतने लगें, क्योंकि आंकड़ों में गिरावट जागरूकता का परिणाम है।

नवंबर में सबसे अधिक संक्रमण के मामले, लेकिन मौतें कम
हालांकि नवंबर माह पूरा होने में अभी 3 दिन शेष हैं। लेकिन अगर हम शहर में पिछले साल मृत हुए लोगों के रिकार्ड देखें तो पूरे माह में कुल 46 मौतें हुई थी। जबकि इस वर्ष 26 नवंबर तक नपा रिकार्ड में इस वर्ष 43 मौत हुई है। इनमें भी 13 लोगों की मृत्यु बीमारी या आकस्मिक हुई है।
हालांकि इन मौत के आंकड़ों में एक सच यह भी
नपा के रिकार्ड में जो मृत्यु के आंकड़े दर्ज हैं वे अशोकनगर मुक्तिधाम में आने वाले लोगों के हैं। इसके अलावा शहर में कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें लोगों की मौत शहर से बाहर हुई है। जिनका रिकार्ड में उल्लेख नही है। इसमें सराफा व्यवसायी की मृत्यु इंदौर में हुई तो स्कूल संचालक की भोपाल में हुई। इनका रिकार्ड नपा के मृत्यु रजिस्टर में दर्ज नही है। इस तरह के मामले अन्य माह में भी सामने आए हैं।
मृतकों में पुरुषों की तुलना में महिलाएं कम: 1 जनवरी से 31 अक्टूबर तक हुई मौतों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम है। शहर में अक्टूबर तक 264 पुरुषों की तुलना में 148 महिलाएं मृत हुई हैं। जबकि वर्ष 2019 में 274 पुरुषों की तुलना में 182 महिलाएं मृत हुई थी। यानी इस वर्ष मृत्यु के आंकड़ों में महिलाओं की मृत्यु का ग्राफ पुरुषों से कम है।

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