पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

होगी अतिरिक्त आमदनी:जमीन पर पड़ी पत्तों की ये गड्डियां कोरोना काल में 20 हजार परिवारों को देगी संबल

अशोकनगर17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
पांच बीघा से भी ज्यादा क्षेत्र में रखी तेंदूपत्ता गड्डियां।   - Dainik Bhaskar
पांच बीघा से भी ज्यादा क्षेत्र में रखी तेंदूपत्ता गड्डियां।  
  • 15 दिन काम करने पर प्रत्येक परिवार को औसतन 5 हजार की अतिरिक्त आमदनी होगी
  • कुल राशि की 25% सीधे लोगों के खाते में जमा

जमीन पर दूर-दूर तक फैली दिखाई दे रही यह पत्तियां तेंदूपत्ता की गड्डियां है। जिन्हें वन क्षेत्र से लगे गांव के लोगों ने तोड़कर इकट्ठा किया है। जंगल से लगे हुए गांव के 20 हजार परिवारों को इन्हीं तेंदूपत्ता से कोरोनाकाल में अतिरिक्त आमदनी होगी। पिछले करीब 8-10 दिनों से ईसागढ़ से लेकर चंदेरी तक के क्षेत्र से लगे गांव के लोग तेंदूपत्ता तोड़ने में लगे है। क्षेत्र के 20 हजार से ज्यादा परिवार इस काम में लगे हैं। औसतन 15 दिनों के इस काम में प्रत्येक परिवार को औसतन 5 हजार रुपए की आमदनी हो जाएगी।

इसमें 50% राशि तत्काल उनके खाते में जमा होना भी शुरू हो चुकी है। बाकी 50% राशि बोनस के रूप में समितियों द्वारा विधि निर्माता कंपनी या बड़े व्यापारियों को तेंदूपत्ता बेचने के बाद बोनस के रूप में मिलेगी। यानी एक तरफ बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की कोरोना के कारण नौकरियां चली गई। लेकिन ऐसे दौर में भी वन क्षेत्र से जुड़े परिवारों को उन्होंने ही आर्थिक संबल प्रदान करने का काम किया है।
ऐसे तय होता है मानदेय
तेंदूपत्ता तोड़ने के बाद 50 पत्तियों की एक गड्डी बनाई जाती है। ऐसी ही 1000 गड्डियां होने पर उसे एक मानक माना जाता है। यानी 50 हजार पत्तियां तोड़ने पर संबंधित परिवार को यह आमदनी होती है।

4.50 करोड़ रुपए में से 1.20 करोड़ का भुगतान
5050 पत्तों की गड्डियां बनाकर वन उपज समितियों के कलेक्शन सेंटर पर भेजते हैं संबंधित लोगों के खाते में सीधे ऑनलाइन रुपए जमा होना शुरू हो गए हैं। अब तक जमा पत्तियों के मान से समितियों को 4.50 करोड रुपए का भुगतान करना है। इनमें से 30% यानी 1.20 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है।
अच्छी क्वालिटी रही तो बोनस अलग से मिलेगा
पत्तियां तोड़कर कलेक्शन सेंटरों पर भेजने के बाद औसतन प्रति परिवार को 2500 से 3 हजार रुपए मिलेंगे। वही जब समितियां इस माल को बड़े शहर में बेचेगी और अच्छी क्वालिटी पर दाम अच्छे मिले तो संबंधित परिवारों को बोनस की राशि भी अलग से दी जाएगी। बोनस की राशि भी औसतन 2500 से 3 हजार रुपए होगी।
11 समितियां, 172 कलेक्शन सेंटर:

वन क्षेत्र से लगे गांव के लोगों से पत्तियां इकट्ठा करने के लिए जिले में 11 समितियां कार्यरत है। इन समितियों ने अलग-अलग क्षेत्र में अपने 172 कलेक्शन सेंटर बना रखे हैं। यहां पत्तियां जमा करते हैं संबंधित परिवार के खाते में सीधे राशि जमा कर दी जाती है।

खबरें और भी हैं...