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अच्छी बारिश न होने से गिरा जलस्तर:मानसून आने के बाद भी जुलाई में जल संकट, 1 किमी दूर खेतों से ढो रहे पानी

अशोकनगर20 दिन पहले
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खेतों में लगे ट्यूबवैल से ट्रैक्टर-ट्रॉली में पानी भरकर ला रहे लोग। - Dainik Bhaskar
खेतों में लगे ट्यूबवैल से ट्रैक्टर-ट्रॉली में पानी भरकर ला रहे लोग।
  • एक दिन छोड़कर हो रही पानी की सप्लाई

क्षेत्र में मानसून को आए करीब एक महीना बीत चुका है। इसके बाद भी क्षेत्र में एक भी अच्छी बारिश नहीं हुई है। इससे बारिश के मौसम में भी क्षेत्र में लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। बारिश नहीं होने से लगातार जलस्तर गिर रहा है। इससे क्षेत्र में नल-जल योजना के तहत एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है। क्षेत्र के करीब 75 प्रतिशत हैंडपंप, निजी ट्यूबवैल और कुएं सूखे पड़े हैं। इससे लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

कस्बा सहित ग्रामीण अंचल में एक भी अच्छी बारिश नहीं हुई हैं। इससे न ही बेलन नदी में पानी आया और न ही खेतों की प्यास बुझ पाई। बेलन नदी में पानी नहीं आने से यहां के हैंडपंप, कुआं ट्यूबवैल आदि सुखे पड़े हैं।

25 प्रतिशत हैंडपंप व बोर ही चल पा रहे हैं। इनसे स्थानीय रहवासियों को पीने के पानी की मदद मिल रही हैं। कस्बे में चल रही पुरानी नल-जल योजना से एक दिन छोड़कर आधे-आधे कनेक्शन धारियों को पानी दे रहे हैं। इसके अलावा गांव के पांच-छह लोग जिनके ट्यूबवैल अच्छे चलते हैं वह लोग दोनों टाइम अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को पानी भरवा रहे हैं। इसके अलावा कई लोग अपने खेतों में लगे ट्यूबवैल औरकुओं से ट्रैक्टर ट्राली में पानी की टंकी रखकर पानी ला रहे हैं। पानी के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश नहीं होने से सूख रही फसलें
बारिश नहीं होने से फसलों का भी हाल खराब है। जिन लोगों ने पहले बारिश होने पर सोयाबीन और उड़द आदि की बोवनी कर दी थी। वह अंकुरित तो हो गई लेकिन तेज धूप पड़ने से फसल मुरझाने से उसे नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही कई खेतों में बारिश नहीं होने से फसल अंकुरित ही नहीं हो पाई थी। अब कई किसानों को दोबारा से फसल की बोवनी करना पड़ेगी।

तीन-चार मोहल्लों में नहीं बिछी पाइप लाइन
कस्बे में डाली जा रही नई नल-जल योजना से अभी पानी मिलना शुरू नहीं हुआ है। अभी भी तीन-चार मोहल्लों में पाइप लाइन बिछाना शेष है। इससे ग्राम वासियों को अभी पानी की समस्या से और जूझना पड़ेगा। जब तक अच्छी और तेज बारिश क्षेत्र में नहीं होती है।

नदी की धार नहीं चलेगी तब तक न तो हैंडपंप, कुओं, और ट्यूबवेल में पानी आ सकेगी। नदी की धार चलने और जलस्तर बढ़ने से ही लोगों को जलसंकट से राहत मिलेगी। बारिश के लिए जगह-जगह अखंड कीर्तन, अखंड रामायण, सुंदरकांड पाठ, भगदर (मंदिर में दाल बाटी बनाना) आदि किए जा रहे हैं। वहीं पानी के भगवान से प्रार्थना सभी समाजों के लोग अपने-अपने रीति रिवाजों से कर रहे हैं।

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