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नवरात्र:पार्वती नदी के किनारे पहाड़ी काटकर बनाए मंदिर में तीन रूप में दर्शन देती हैं चामुंडा माता

आष्टाएक महीने पहले
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पार्वती नदी के किनारे पहाड़ी काटकर मां चामुंडा का मंदिर बनाया गया है। समाजसेवी गेंदालाल राय ने काले पाषाण की 5 फीट ऊंची मां चामुंडा की प्रतिमा दी और मप्र राज्य परिवहन निगम के कर्मचारी स्टैंड कंडेक्टर नारायणप्रसाद शर्मा (शाजापुर) की प्रेरणा से 1973 में मंदिर का निर्माण शुरू हुआ।

पुजारी पंडित हेमंत गिरी बताते हैं कि शर्मा की प्रेरणा से एक दिन में 1500 रुपए इकट्ठा हुए और मंदिर निर्माण शुरू हुआ। 1976 में मंदिर बनकर तैयार हुआ। समाजसेवी, राजस्व व पुलिस विभाग व विद्यार्थियों का सहयोग मिला। सभी ने पहाड़ी काटने से लेकर मंदिर निर्माण में कारसेवा की। उस समय के एसडीएम रामपालसिंह चौहान ने पहाड़ी काटने के लिए गेंती चलाई।

15 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है मंदिर : पुजारी गिरी बताते हैं कि शंकर मंदिर परिसर में ही स्थित 15 फीट ऊंची पहाड़ी पर मां चामुंडा का मंदिर बनाया गया है। मंदिर की 150 फीट की परिधि है। माता का गर्भगृह 20 बाय 15 का है। माता का मंदिर किले में स्थित है। यहां 1990 तक कोर्ट, तहसील व एसडीएम कार्यालय लगता था।

उद्घाटन में आए थे सहकारिता मंत्री : मंदिर के उद्घाटन में तत्कालीन सहकारिता मंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा सहित क्षेत्र के समाजसेवी, जनप्रतिनिधि आदि शामिल हुए थे। हर साल नवमी को ढाई क्विंटल खीर का भोग माताजी को लगाया जाता है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते 40 किलो का ही भोग लगाया जाएगा।

नवरात्रि के नौ दिन तक रोज मां का अलग-अलग रूप में शृंगार किया जाता है। नवमी के दिन यहां बड़ी संख्या में कन्या पूजन भी किया जाता है, जो इस बार कोरोना के कारण कम संख्या में किया जाएगा। यहां मां की प्रतिमा में सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवा और शाम को वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं।

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