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समस्या:दुग्ध संघ ने रेट बढ़ाने की बजाए घटा दिए, पशु पालकों के सामने बनी दिक्कत

आष्टा13 दिन पहले
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इस महंगाई के दौर में अब पशु पालना भी दूध उत्पादक किसानों के लिए महंगा पड़ रहा है, क्योंकि भोपाल दुग्ध संघ ने दूध के रेट बढ़ाने की बजाए उन्हें और कम कर दिया है, जबकि पशु आहार के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। ऐसे में पशु पालकों को सीधा नुकसान ही हाे रहा है। उधर सरकार किसानों से दूध में वृद्धि करने के लिए प्रेरित कर रही है। क्षेत्र के किसान लंबे समय से दूध के रेट बढ़ाने की मांग करते आ रहे हैं। जबकि दूध के दाम बढ़ाने की बजाए दूध संघ ने दूध के रेट घटा दिए हैं। जबकि दूध संघ व सरकार लगातार दूध का किसानों से उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है। पिछले अप्रैल माह तक भोपाल दुग्ध संघ द्वारा किसानों से दूध 6 रुपए 50 पैसे प्रति फेट के मान से खरीदा जा रहा था और किसानों को मई माह में दूध के दाम बढ़ाए जाने की उम्मीद थीं, लेकिन मई माह में दूध के दाम घटाकर 5 रुपए 80 पैसे प्रति फेट कर दिए हैं।

जबकि पशुचारा, खली सुदाना के कई गुना भाव बढ़ गए हैं। ऐसे में किसानों के सामने पशु पालना घाटे का सौदा साबित हाे रहा है। कुछ साल पहले दुग्ध संघ की गलत नीतियों के कारण क्षेत्र की दुध डेरियां हड़ताल के चलते कई दिनों तक बंद रही थीं। इस संबंध में किसान रमेश पाटीदार का कहना है कि एक तरफ तो सरकार किसानों से पशुपालन करने पर जोर दे रही है, लेकिन दुग्ध संघ की गलत नीतियों के कारण दुध का व्यवसाय करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

इस समय एक गाड़ी भूसा दो हजार रुपए में मिलता है। जो खली की बोरी पहले एक हजार रुपए में मिलती थी। वह अब 2200 सौ रुपए में मिल रही है वह भी हल्की क्वालिटी की। इसी प्रकार सुदाना की बोरी पहले 695 रुपए में मिलती थी वह अब 950 रुपए में मिल रही है। खजूरिया के किसान राजेन्द्र सिंह पटेल ने बताया कि 27 मार्च 2021 को कमिश्नर भोपाल द्वारा आष्टा में क्षेत्र की दुग्ध सहकारी समितियों के अध्यक्ष व सचिवों की बैठक ली गई थी।

जिसमें कमिश्नर ने सभी से दूध उत्पादन बढ़ाने की बात कही थी। जबकि दुग्ध उत्पादन कैसे बढ़ाए क्याेंकि दुग्ध संघ तो किसानों को दूध के भाव वाजिब नहीं दे रहा है। जबकि जनवरी माह में जो खली की बोरी 15 सौ रुपए में मिल रही थी वहीं बोरी अब 21 से 22 सौ रुपए में मिल रही है। यानि एक बोरी में 6 सौ रुपए से अधिक बढ़ गए। वहीं दूध के दाम बढाने के बजाए घटा दिए।

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