धर्मसभा:शरीर की बीमारी बड़ी नहीं है मन की बीमारी बड़ी: मुनिश्री

आष्टा6 महीने पहले
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  • क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने ऑनलाइन धर्म सभा में कहा

स्वस्थ और खुश रहने के लिए मना स्थिति बदले परिस्थिति नहीं। मन स्थिति के बदलते हैं परिस्थिति अपने आप बदली-बदली नजर आएगी। आदमी जो सोचता है वहीं उसकी जिंदगी बन जाती है। हर कार्य को उत्साह और उमंग के साथ करें मगर भूलकर भी निराशा और नेगेटिव थॉट्स मन में न लाएं। क्योंकि वह हमारे कार्यों में व्यवधान बनकर खड़े हो जाते हैं फिर खुश रहने वाला व्यक्ति भी बीमार और दुखी हो जाता है।

यह बातें क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने ऑनलाइन धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहीं। आगे कहा कि शरीर की बीमारी बड़ी नहीं है मन की बीमारी बड़ी है। मन जब बीमार होता है तो बुरे संस्कार और बुरे कार्यों को जन्म देता है।

मन जब स्वस्थ होता है तो प्रभु भक्ति गुरु भक्ति सत्कार्यों में अपने समय का सद उपयोग करता है। जब आपके ऊपर कोई क्रोध करें तो बुरा न माने बल्कि यह सोचे कि यह बीमार है और बीमार व्यक्ति का क्या बुरा मानना। बस यहीं पॉजिटिव सोच उसके क्रोध भरे शब्दों को आपके दिल तक नहीं पहुंचने देंगे। जब वह शब्द दिल तक नहीं पहुंचेंगे तो चिंता पैदा नहीं होगी, चिंता पैदा नहीं होगी तो शरीर स्वस्थ रहेगा।

मुनिश्री ने आगे कहा कि आज का मनुष्य शिकायत करना तो जानता है मगर शुक्रिया करना नहीं जानता है। शुक्रिया करने की जिनकी आदत होती है उन्हें संसार स्वर्ग से भी सुंदर नजर आने लगता है। सुबह उठकर सबसे पहले अपने मन और शरीर को शुक्रिया कहें कि उन्होंने आज का सूरज देखने का तुम्हें मौका दिया।

दूसरे नंबर पर परमात्मा को शुक्रिया कहें जिनके चरणों में शीश झुकाने से तुम्हारा सिर महान बन गया। तीसरे नंबर पर जो तुम्हारे साथ परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, नौकर उन सभी को शुक्रिया कहें कि वह तुम्हें सही राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

वस्तुओं से आराम मिल सकता है खुशी नहीं। खुशी तो शांत चित्त मन का गहना है। मन खुश है तो सब अच्छा है मन दुखी है तो मीठा रसगुल्ला भी स्वाद नहीं देगा। मन अगर खुश है तो सूखी रोटी भी अमृत्तुल्य लगेगी। मन को हमेशा पॉजिटिव सोच से खुश रखो तब आप पाएंगे कि आपका शरीर स्वस्थ और सुंदर हो चुका है।

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